समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को लेकर कांग्रेस और एआईएमआईएम ने निशाना साधा। भोपाल में कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि उन्हें पहले देश में गरीबी, महंगाई और बेरोजगारी के बारे में जवाब देना चाहिए। वह कभी भी मणिपुर के मुद्दों पर नहीं बोलते हैं, पूरा राज्य जल रहा है। वह सिर्फ इन सभी मुद्दों से लोगों का ध्यान भटका रहे हैं।
असदुद्दीन ओवैसी ने पीएम मोदी के बयान पर साधा निशाना, दी यह सलाह
वहीं, भोपाल में ही एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पीएम मोदी के बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि "भारत के प्रधानमंत्री भारत की विविधता और इसके बहुलवाद को एक समस्या मानते हैं। इसलिए, वह ऐसी बातें कहते हैं... क्या आप यूसीसी के नाम पर देश के बहुलवाद और विविधता को छीन लेंगे?... जब वह यूसीसी की बात करते हैं, तो वह हिंदू नागरिक संहिता की बात कर रहे हैं...मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि क्या वे हिंदू अविभाजित परिवार को खत्म कर सकते हैं?...जाइए और पंजाब में सिखों को यूसीसी के बारे में बताइए, देखिए वहां क्या प्रतिक्रिया होती है..."
राजद ने भी यूसीसी टिप्पणी पर पीएम मोदी पर किया हमला
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने भी मंगलवार को मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी को लेकर उन पर हमला करते हुए कहा कि उन्हें ऐसे मुद्दों को "डॉग व्हिसल की राजनीति" (विरोध भड़काए बिना किसी विशेष समूह से समर्थन हासिल करने के लिए राजनीतिक संदेश) का साधन नहीं बनाना चाहिए। राजद के प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद मनोज झा का हमला प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने भी यूसीसी की वकालत की है, लेकिन वोट बैंक की राजनीति करने वाले इसका विरोध कर रहे हैं।
भाजपा के 'मेरा बूथ सबसे मजबूत' अभियान के तहत मंगलवार को भोपाल में भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने यूसीसी की बात करते हुए कहा कि भारतीय मुसलमानों को यह समझना होगा कि कौन से राजनीतिक दल उन्हें भड़काकर उनका फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, हम देख रहे हैं कि समान नागरिक संहिता के नाम पर ऐसे लोगों को भड़काने का काम किया जा रहा है। अगर सदन में एक सदस्य के लिए एक कानून होगा और दूसरे के लिए दूसरा, तो क्या सदन चल पाएगा? तो ऐसी दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चल पाएगा?'
प्रधानमंत्री की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राजद प्रवक्ता झा ने कहा कि प्रधानमंत्री को सुनकर ऐसा लगता है कि वह 'डॉग व्हिसल' बजाने के मौके की तलाश में हैं। झा ने कहा, प्रधानमंत्री को बोलने से पहले 21वें कानून आयोग ने जो कहा था, उसकी जांच करनी चाहिए थी, बिना मदद लिए संविधान सभा की बहसों का गहराई से विश्लेषण करना चाहिए था क्योंकि जो लोग आपकी मदद करना चाहते हैं, वे आपके जरिए ही आपको नुकसान पहुंचाते हैं।
उन्होंने पूछा, मेरे लिए उन्हें यह बताना महत्वपूर्ण है कि यह कोई बकवास नहीं है कि आप इसे हिंदू-मुस्लिम का मुद्दा बना दें, इसमें हमारे आदिवासियों की परंपराएं भी शामिल हैं। अन्य मुद्दे भी हैं, हिंदू विवाह संस्कार, इस्लामी विवाह अनुबंध। उनके बारे में क्या किया जाएगा।