बैठक में शामिल एक अन्य विपक्षी नेता ने बताया कि ज्यादातर नेताओं की राय यही थी कि कांग्रेस को अपनी रीति नीति सुधारनी होगी और विपक्ष के साथ निरंतर संवाद और सहयोग बढ़ाना होगा। अब वह समय नहीं है जब पूरे देश में कांग्रेस की तूती बोलती थी। अब उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, उड़ीसा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, प.बंगाल जैसे राज्यों में कांग्रेस का जनाधार बहुत सीमित हो गया है और कई जगह तो उसका सफाया हो गया है। जबकि दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, गोवा, कर्नाटक, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में भी कांग्रेस पहले जैसी मजबूत हालत में नहीं है। कई राज्यों में क्षेत्रीय दल उससे ज्यादा मजबूत हैं। इसलिए कांग्रेस को जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए भाजपा के खिलाफ उन सारी ताकतों को जगह देनी होगी जो अपने अपने प्रभाव क्षेत्र में भाजपा को मजबूत चुनौती दे रही हैं। राज्यसभा सांसद इस नेता के मुताबिक बैठक में इस पर चर्चा हुई।
कपिल सिब्बल के घर पर हुई बैठक को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी या पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को विश्वास में लिया गया था या नहीं, इस सवाल के जवाब में सिब्बल का कहना था कि यह कांग्रेस पार्टी का आयोजन नहीं था और उन्होंने कांग्रेस नेता की हैसियत से नहीं बल्कि अपने निजी रिश्तों के आधार पर सबको निजी दावत पर बुलाया था। लेकिन इसमें पार्टी में अलग खेमा बनाने जैसी कोशिश देखना गलत है। गौरतलब है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता होने के साथ साथ कपिल सिब्बल देश के जाने माने वकील भी हैं और कांग्रेस और विपक्ष के ज्यादातर नेताओं ने उनसे कभी न कभी कानूनी लड़ाई में मदद ली है। इसलिए उनके सब नेताओं से बेहद प्रगाढ़ निजी संबंध भी हैं। इस नाते कांग्रेस अगर चाहे तो उनका उपयोग विपक्षी दलों के साथ समन्वय बनाने और दूरी पाटने के लिए भी कर सकती है। जैसे कपिल की दावत में बीजू जनता दल, अकाली दल, आम आदमी पार्टी जैसे उन दलों के नेताओं का आना जिनकी कांग्रेस से दूरी अभी भी बरकरार है, मायने रखता है। अन्ना आंदोलन से पैदा हुआ आम आदमी पार्टी के नेता सांसद संजय सिंह भी इस दावत में आए थे और अहम बात ये है कि अन्ना आंदोलन के दौरान यूपीए के वरिष्ठ मंत्री के रूप में उस आंदोलन को समाप्त कराने में कपिल सिब्बल की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका थी। अन्ना आंदोलन के प्रथम चरण की सारी वार्ताएं कपिल सिब्बल के घर पर ही होती थीं। इस लिहाज से अरविंद केजरीवाल और संजय सिंह के साथ उनका संवाद तब से है।
राजद संस्थापक लालू प्रसाद यादव के ज्यादातर मुकदमों में सिब्बल ने ही बतौर वकील पैरवी की और राजद की मदद से वह एक बार बिहार से राज्यसभा में भी रहे। इसी तरह सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव, एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, बीजद नेता पिनाकी मिश्रा, अकाली नेता नरेश गुजराल आदि से भी कपिल सिब्बल के बेहद करीबी निजी रिश्ते हैं। तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष प.बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत लगभग सभी प्रमुख नेताओं की मित्रता सिब्बल से है। बैठक में शामिल एक अन्य नेता के मुताबिक कपिल सिब्बल की कांग्रेस को विपक्षी दलों के बीच स्वीकार्य बनाने में अहम भूमिका हो सकती है बशर्ते कांग्रेस नेतृत्व इसे समय रहते समझ ले और उनका पार्टी हित में सदुपयोग करे।