फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मूडीज रेटिंग: मनमोहन बोले- अभी नहीं बीते दुख भरे दिन, चिदंबरम ने भी कसा तंज

Sat, 18 Nov 2017 06:12 PM IST
एजेंसी/ मुंबई
विज्ञापन
पी चिदंबरम - फोटो : social media
विज्ञापन
पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने मूडीज की रेटिंग में सुधार पर बल्लियों उछल रही मोदी सरकार की खिल्ली उड़ाते हुए कहा है कि जब इस एजेंसी ने रेटिंग घटाई थी तो इसी सरकार ने उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए विरोध में कड़ा पत्र लिखा था।
विज्ञापन


टाटा लिटरेचर लाइव कार्यक्रम में शनिवार को उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले ही मोदी सरकार ने कहा था कि मूडीज का रेटिंग तय करने का तरीका गलत है क्योंकि तब एजेंसी ने भारत की रेटिंग घटा दी थी। रेटिंग कम किए जाने के विरोध में तत्कालीन आर्थिक मामले सचिव शक्तिकांत दास ने मूडीज को एक लंबी चिट्ठी लिखी थी, जिसमें एजेंसी से कहा गया था कि वह रेटिंग तय करने का अपना तरीका बदल दे क्योंकि यह ठीक नहीं है।

पढ़ें: सभा कैंसिल हुई तो BJP पर भड़के हार्दिक पटेल, सीडी पर करने वाले थे 'खुलासा'

चिदंबरम ने कहा कि मूडीज ने रेटिंग में सुधार के पीछे देश के आर्थिक विकास में तेजी को प्रमुख कारक बताया है। जबकि हकीकत यह है कि पिछले तीन साल से विकास दर लगातार गिर रही है। वित्त वर्ष 2015-16 में यह 8.0 फीसदी थी, जो 2016-17 में 7.1 फीसदी पर पहुंच गई और 2017-18 में इसके 6.7 फीसदी रहने का अनुमान है। उन्होंने सवाल किया कि इसे बढ़ना कहते हैं कि घटना, यह आप खुद ही तय कर लें।
विज्ञापन

 
विज्ञापन

बढ़ रही है बेरोजगारी

manmohan singh
खराब है अर्थव्यवस्था की सेहत
उन्होंने कहा कि किसी भी अर्थव्यवस्था की सेहत सकल स्थिर पूंजी निर्माण, ऋण उठाव और रोजगार के तीन संकेतकों पर निर्भर करती है और इन तीनों मानकों में गिरावट दर्ज की जा रही है। सकल स्थिर पूंजी निर्माण में 7-8 फीसदी की कमी आई है और इसमें सुधार के कोई लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं। पिछले सात-आठ सालों में निजी निवेश अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुका है। कई सरकारी परियोजनाएं ठप पड़ी हुई हैं और कई निजी कंपनियां दिवालिया घोषित किए जाने के कगार पर खड़ी हैं। इन वजहों से तालाबंदी और बेरोजगारी बढ़नी तय है।

बढ़ रही है बेरोजगारी
चिदंबरम ने कहा कि बैंकों से ऋण उठाव दो दशकों में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। छोटे एवं मझोले उद्योगों को गैर-बैंकिंग स्रोतों से कर्ज लेना पड़ रहा है। बढ़ती बेरोजगारी पर उन्होंने कहा कि सरकार विश्वसनीय और प्रामाणिक आंकड़े पेश नहीं कर रही है। सेंटर फॉर मानिटरिंग इंडियन इकोनामी (सीएमआईई) के अनुसार इस साल जनवरी से जून के बीच 19.60 लाख लोगों की नौकरी छूटी है। 

अभी नहीं बीते दुख भरे दिन: मनमोहन

वहीं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी मूडीज की रेटिंग में सुधार पर खुश हो रही सरकार को आगाह किया है कि अभी अर्थव्यवस्था के दुख भरे दिन खत्म नहीं हुए हैं। मोदी सरकार गलतफहमी में अपनी पीठ ठोक रही है। केरल के एर्नाकुलम जिले में एक सेमिनार में शामिल होने आए पूर्व पीएम ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि जिस तरह से कच्चे तेल के दाम बढ़ रहे हैं, उससे देश के भुगतान संतुलन पर संकट पैदा होने का खतरा है। इससे राजकोषीय असंतुलन भी पैदा हो सकता है। मालूम हो कि मूडीज ने 13 साल बाद भारत की रेटिंग बीएए3 से बीएए2 करने की घोषणा की है। मोदी सरकार इस उपलब्धि को अपने आर्थिक सुधारों का नतीजा बता रही है।
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें