पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने मूडीज की रेटिंग में सुधार पर बल्लियों उछल रही मोदी सरकार की खिल्ली उड़ाते हुए कहा है कि जब इस एजेंसी ने रेटिंग घटाई थी तो इसी सरकार ने उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए विरोध में कड़ा पत्र लिखा था।
टाटा लिटरेचर लाइव कार्यक्रम में शनिवार को उन्होंने कहा कि कुछ महीने पहले ही मोदी सरकार ने कहा था कि मूडीज का रेटिंग तय करने का तरीका गलत है क्योंकि तब एजेंसी ने भारत की रेटिंग घटा दी थी। रेटिंग कम किए जाने के विरोध में तत्कालीन आर्थिक मामले सचिव शक्तिकांत दास ने मूडीज को एक लंबी चिट्ठी लिखी थी, जिसमें एजेंसी से कहा गया था कि वह रेटिंग तय करने का अपना तरीका बदल दे क्योंकि यह ठीक नहीं है।
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चिदंबरम ने कहा कि मूडीज ने रेटिंग में सुधार के पीछे देश के आर्थिक विकास में तेजी को प्रमुख कारक बताया है। जबकि हकीकत यह है कि पिछले तीन साल से विकास दर लगातार गिर रही है। वित्त वर्ष 2015-16 में यह 8.0 फीसदी थी, जो 2016-17 में 7.1 फीसदी पर पहुंच गई और 2017-18 में इसके 6.7 फीसदी रहने का अनुमान है। उन्होंने सवाल किया कि इसे बढ़ना कहते हैं कि घटना, यह आप खुद ही तय कर लें।