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राजनीति: प्रधानमंत्री मोदी के साथ आर-पार की लड़ाई की तैयारी में है कांग्रेस, अधीर ही करेंगे अगुवाई

Wed, 14 Jul 2021 07:18 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

लोकसभा में नेता अधीर रंजन रंजन चौधरी ने पद से इस्तीफा दे दिया है। अब पार्टी लोकसभा में अपना नया नेता चुनेगी। मुख्य सचेतक भी बदला जा सकता है। इसके लिए बैठक चल रही है। क्या पता राहुल गांधी लोकसभा में पार्टी के नेता का दायित्व संभालने के लिए तैयार हो जाएं?
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नरेंद्र मोदी-राहुल गांधी - फोटो : PTI (फाइल फोटो)
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2024 तक की चुनौतियों को अभी से भांपकर बहुत सधे तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। कांग्रेस पार्टी के रणनीतिकारों की नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हर कदम पर है। पार्टी के एक पूर्व महासचिव का कहना है कि केंद्र सरकार रसोई गैस, पेट्रोल डीजल के दाम, कोरोना से लड़ाई, देश के विकास, आर्थिक मुद्दे समेत सभी स्तरों पर फेल है। झूठे दावे कर रही है। सूत्र का कहना है कि जनता भी सरकार से बहुत निराश है, लेकिन उसे विपक्ष में विकल्प नहीं नजर आ रहा है। वह कहते हैं कि कोई कुछ भी कहे, लेकिन अभी यह विकल्प केवल कांग्रेस पार्टी ही दे सकती है।

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कभी राहुल गांधी के नजदीकी गिने जाने वाले सूत्र का कहना है कि कांग्रेस पार्टी विकल्प देने की तैयारी कर रही है। वह कहते हैं कि संसद के मानसूत्र सत्र से काफी कुछ नजर आएगा। राहुल गांधी के सचिवालय के एक सूत्र का कहना है कि भाजपा बहुत कुछ कर रही है तो कांग्रेस भी चुप कैसे रह सकती है। हालांकि मंगलवार को चुनाव प्रचार अभियान के रणनीतिकार प्रशांत किशोर के साथ हुई बैठक के बारे में वह कुछ नहीं बता सके।

अधीर रंजन ही रहेंगे लोकसभा में कांग्रेस के संसदीय दल के नेता 
मुर्शिदाबाद से कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता के पद पर बने रहेंगे। साथ ही वे पश्चिम बंगाल कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष का कार्यभार भी संभालते रहेंगे। पिछले दिनों ममता बनर्जी से रिश्ते सुधारने की कवायद में अधीर को संसदीय दल के नेता के पद से हटाने का प्रस्ताव पर कांग्रेस आलाकमान विचार कर रहा था। 
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अधीर को पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी का घोर विरोधी माना जाता रहा है। गत विधानसभा चुनाव में अधीर की पहल पर ही कांग्रेस ने वाम दलों से गठबंधन किया था, लेकिन कांग्रेस एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हुई। इसी के बाद अगले लोकसभा चुनाव तृणमूल कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ने की मांग राज्य पार्टी इकाई से उठने लगी थी। 

चूंकि अधीर इस मामले में सबसे बड़े रोड़ा थे इसलिए उन्हें पद से हटाए जाने की मांग की जा रही थी। बतौर नेता संसदीय दल तृणमूल कांग्रेस के साथ मिलकर मुद्दे उठाने के विरोधी थे। उनके उत्तराधिकारी के रूप में मनीष तिवारी या शशि थरूर का नाम भी लिया जा रहा था।

लेकिन कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक अधीर को संसदीय दल के नेता पद से हटाने का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है। बता दें, मुर्शिदाबाद और मालदा इलाकों में अधीर चौधरी का अच्छा दबदबा है। ऐसे में जब कांग्रेस विधानसभा की एक भी सीट नहीं जीत पाई तो फिलहाल पार्टी उन्हें नाराज नहीं करना चाहती।

चौधरी से मतभेदों के बीच रोहन मित्रा ने दिया इस्तीफा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी से मतभेदों के बीच दिवंगत नेता सोमेन मित्र के बेटे और पश्चिम बंगाल कांग्रेस के महासचिव रोहन मित्रा ने विधानसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी लेते हुए बुधवार को पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने लिखा कि वे चौधरी के नेतृत्व में काम करने के इच्छुक नहीं हैं। लेकिन सूत्रों के अनुसार उनके इस्तीफे का चौधरी पर कोई असर पड़ने की संभावना नहीं है और वह बतौर प्रदेश अध्यक्ष काम करते रहेंगे।

अब नहीं तो कभी नहीं, चुप नहीं बैठ सकते

महिला कांग्रेस की प्रमुख सुष्मिता देव कहती हैं कि राजनीति में चुप रहकर नहीं बैठ सकते। हमें बताइए पिछले सात साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने जनता से जो वादा किया था, उसे कितना पूरा किया। आम आदमी का जीना मुहाल है और सरकार सभी मुद्दों पर फेल है। सुष्मिता देव कहती हैं कि कांग्रेस एक जिम्मेदार विपक्ष है और पार्टी अपनी जिम्मेदारी को निभाती आई है, निभाती रहेगी। कांग्रेस पार्टी के भीतर कई तरह के मंथन चल रहे हैं। इनमें सबसे गंभीर चर्चा राजनीतिक वजूद को लेकर ही चल रही है। कांग्रेस पार्टी को अपना एक पूर्णकालिक, सर्वमान्य अध्यक्ष चुनना है ताकि पार्टी के भीतर उस चेहरे को लेकर कोई अंदरुनी आवाज न उठे। बताते हैं ऐसा चेहरा फिलहाल कार्यवाहक अध्यक्ष सोनिया गांधी ही हैं। लेकिन क्या सोनिया गांधी पूर्णकालिक अध्यक्ष की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं? इस सवाल के जवाब में पार्टी के नेता कहते हैं कि इसका जवाब तो वही दे सकती हैं।

अध्यक्ष तो बनना नहीं चाहते फिर राहुल गांधी क्या करेंगे?

राहुल गांधी के नजदीकी नेता ही इसे ज्यादा प्रचारित कर रहे हैं कि गांधी पार्टी का अध्यक्ष नहीं बनना चाहते। वह मना कर रहे हैं। पिछले दो साल से यही चल रहा है। लेकिन कांग्रेस पार्टी राजनीति करेगी और पार्टी को अध्यक्ष तो चाहिए? फिर राहुल गांधी क्या करेंगे? इस सवाल के जवाब में कांग्रेस के भीतर सूचनाओं पर अच्छी पकड़ रखने वाले सूत्र ने कहा था कि लोकसभा में नेता अधीर रंजन रंजन चौधरी ने पद से इस्तीफा दे दिया है। अब पार्टी लोकसभा में अपना नया नेता चुनेगी। मुख्य सचेतक भी बदला जा सकता है। इसके लिए बैठक चल रही है। क्या पता राहुल गांधी लोकसभा में पार्टी के नेता का दायित्व संभालने के लिए तैयार हो जाएं? ऐसा हुआ तो वह केन्द्र सरकार को खुलकर घेरेंगे। सूत्र का कहना है कि राहुल गांधी आक्रामक तरीके से अपनी बात कहने, हमला बोलने में किसी तरह का बदलाव नहीं करने जा रहे हैं। हां, इसमें थोड़ा संतुलन लाने की जरूरत महसूस हो रही है। वह अपने तरीके में इसे लेकर थोड़ा बदलाव ला सकते हैं। हालांकि कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष की इच्छा एक कार्यकर्ता और सांसद के तौर पर ही पार्टी की सेवा करने की ही है।
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क्या प्रशांत किशोर कांग्रेस ज्वाइन करेंगे?

बेंगलुरू के एक पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने इस सवाल पर जरूर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर ने ही कहा था कि वह चुनाव प्रचार अभियान का काम छोड़कर सक्रिय राजनीति में आना चाहते हैं। वह शरद पवार के बाद राहुल गांधी से मिले हैं। कई दलों के नेताओं के साथ उनके संपर्क हैं। किस दल में जाना चाहते हैं, यह प्रशांत किशोर का अधिकार है। उन्हें इसे तय करने दीजिए। यदि वह राजनीति करना चाहेंगे तो उन्हें कोई न कोई बैनर तो चाहिए।

क्या कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी उठाएंगी बड़ा कदम?

उत्तर प्रदेश के पूर्व केंद्रीय मंत्री कहते हैं कि आखिर अब नहीं तो कब ठोस कदम उठाएंगी। मेरा तो मानना है कि ठोस कदम उठाना पड़ेगा। कांग्रेस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार और भाजपा से राजनीतिक लड़ाई तेज करने के लिए बड़े फैसले लेने पड़ेंगे। सूत्र का कहना है कि कांग्रेस में जिस तरह से कई राज्यों में अंदरूनी कलह चल रही है, इस तरह की स्थितियों से भी बाहर आना ही होगा। सूत्र का कहना है कि मुझे लगता है कि जुलाई-अगस्त तक सबकुछ ठीक हो जाएगा।
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