अब नहीं तो कभी नहीं, चुप नहीं बैठ सकते
महिला कांग्रेस की प्रमुख सुष्मिता देव कहती हैं कि राजनीति में चुप रहकर नहीं बैठ सकते। हमें बताइए पिछले सात साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने जनता से जो वादा किया था, उसे कितना पूरा किया। आम आदमी का जीना मुहाल है और सरकार सभी मुद्दों पर फेल है। सुष्मिता देव कहती हैं कि कांग्रेस एक जिम्मेदार विपक्ष है और पार्टी अपनी जिम्मेदारी को निभाती आई है, निभाती रहेगी। कांग्रेस पार्टी के भीतर कई तरह के मंथन चल रहे हैं। इनमें सबसे गंभीर चर्चा राजनीतिक वजूद को लेकर ही चल रही है। कांग्रेस पार्टी को अपना एक पूर्णकालिक, सर्वमान्य अध्यक्ष चुनना है ताकि पार्टी के भीतर उस चेहरे को लेकर कोई अंदरुनी आवाज न उठे। बताते हैं ऐसा चेहरा फिलहाल कार्यवाहक अध्यक्ष सोनिया गांधी ही हैं। लेकिन क्या सोनिया गांधी पूर्णकालिक अध्यक्ष की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं? इस सवाल के जवाब में पार्टी के नेता कहते हैं कि इसका जवाब तो वही दे सकती हैं।
अध्यक्ष तो बनना नहीं चाहते फिर राहुल गांधी क्या करेंगे?
राहुल गांधी के नजदीकी नेता ही इसे ज्यादा प्रचारित कर रहे हैं कि गांधी पार्टी का अध्यक्ष नहीं बनना चाहते। वह मना कर रहे हैं। पिछले दो साल से यही चल रहा है। लेकिन कांग्रेस पार्टी राजनीति करेगी और पार्टी को अध्यक्ष तो चाहिए? फिर राहुल गांधी क्या करेंगे? इस सवाल के जवाब में कांग्रेस के भीतर सूचनाओं पर अच्छी पकड़ रखने वाले सूत्र ने कहा था कि लोकसभा में नेता अधीर रंजन रंजन चौधरी ने पद से इस्तीफा दे दिया है। अब पार्टी लोकसभा में अपना नया नेता चुनेगी। मुख्य सचेतक भी बदला जा सकता है। इसके लिए बैठक चल रही है। क्या पता राहुल गांधी लोकसभा में पार्टी के नेता का दायित्व संभालने के लिए तैयार हो जाएं? ऐसा हुआ तो वह केन्द्र सरकार को खुलकर घेरेंगे। सूत्र का कहना है कि राहुल गांधी आक्रामक तरीके से अपनी बात कहने, हमला बोलने में किसी तरह का बदलाव नहीं करने जा रहे हैं। हां, इसमें थोड़ा संतुलन लाने की जरूरत महसूस हो रही है। वह अपने तरीके में इसे लेकर थोड़ा बदलाव ला सकते हैं। हालांकि कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष की इच्छा एक कार्यकर्ता और सांसद के तौर पर ही पार्टी की सेवा करने की ही है।
क्या प्रशांत किशोर कांग्रेस ज्वाइन करेंगे?
बेंगलुरू के एक पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने इस सवाल पर जरूर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर ने ही कहा था कि वह चुनाव प्रचार अभियान का काम छोड़कर सक्रिय राजनीति में आना चाहते हैं। वह शरद पवार के बाद राहुल गांधी से मिले हैं। कई दलों के नेताओं के साथ उनके संपर्क हैं। किस दल में जाना चाहते हैं, यह प्रशांत किशोर का अधिकार है। उन्हें इसे तय करने दीजिए। यदि वह राजनीति करना चाहेंगे तो उन्हें कोई न कोई बैनर तो चाहिए।
क्या कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी उठाएंगी बड़ा कदम?
उत्तर प्रदेश के पूर्व केंद्रीय मंत्री कहते हैं कि आखिर अब नहीं तो कब ठोस कदम उठाएंगी। मेरा तो मानना है कि ठोस कदम उठाना पड़ेगा। कांग्रेस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार और भाजपा से राजनीतिक लड़ाई तेज करने के लिए बड़े फैसले लेने पड़ेंगे। सूत्र का कहना है कि कांग्रेस में जिस तरह से कई राज्यों में अंदरूनी कलह चल रही है, इस तरह की स्थितियों से भी बाहर आना ही होगा। सूत्र का कहना है कि मुझे लगता है कि जुलाई-अगस्त तक सबकुछ ठीक हो जाएगा।