अमर उजाला संवाद में केंद्रीय कानून, न्याय और संसदीय कार्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि जनगणना कांग्रेस ने 2011 में कराई थी तो उन्होंने जातिगत जनगणना का आंकड़ा क्यों नहीं जारी किया? तब तो वह सरकार में थे। जब राहुल गांधी को इतना प्रेम था तो उन्होंने इस आंकड़े को बाहर क्यों नहीं निकाला।
उन्होंने कहा कि जनगणना में एससी-एसटी का कॉलम है। उस पर चारों जाति जनगणना होती है। कांग्रेस सत्ता में आने के लिए पलटी मार रही है और जातिगत जनगणना को मुद्दा बना रही है। 1951 में जब बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने जब इस्तीफा दिया था तो पांच कारण गिनाए थे, इसमें एक था कि नेहरू जी ने ओबीसी का कमीशन नहीं बनाया। काका कालेकर समिति की रिपोर्ट, मंडल कमीशन की रिपोर्ट कांग्रेस शासन में ही आई थी, तब उन्होंने आंकड़ा जारी नहीं किया। अब इनका ओबीसी प्रेम कैसे उमड़ गया?
अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए सदन में बोले हैं कि मैं जातिगत जनगणना के पक्ष में नहीं हूं। मैं ओबीसी एससी-एसटी के कल्याण की बात करने वालों के पक्ष में नहीं हूं। वे तो यहां तक बोले हैं कि क्या आप बुद्धू लोगों को आरक्षण दे दोगे? राहुल गांधी को उनका भाषण पढ़ना चाहिए। अब कहां से अचानक उनका ओबीसी प्रेम उमड़ पड़ा? 1951 से गलतियां हो रही हैं? यह सब कांग्रेस का स्टैंड है। अब कांग्रेस ने अपना स्टैंड बदल लिया है।
कानून और संसदीय कार्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार तभी काम करती है, जब उसे बहुमत मिलता है। बहुमत का आंकड़ा 272 है, जो हमें और हमारे साथियों को मिला है। इसलिए हम सरकार में हैं। इस चुनाव में उड़ीसा, आंध्रप्रदेश, केरल में हम जीते है। चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन बेहतर रहा। नेहरू जी के बाद कोई तीन बार प्रधानमंत्री नहीं बन सका। कांग्रेस नहीं चाहती थी कि प्रधानमंत्री तीसरी बार पीएम बनें। मगर यह पीएम मोदी के लिए भी ऐतिहासिक है।