कांग्रेस नेता ने तीसरा सवाल ये पूछा है कि पिछले कुछ वर्षों में चीनी घुसपैठ लगभग सभी क्षेत्रों में हुई है। लद्दाख से उत्तराखंड तक और सिक्किम से अरुणाचल प्रदेश तक घुसपैठ हुई है। चीन, एलएसी के साथ अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है। वह भारतीय क्षेत्र में बार-बार घुसपैठ कर रहा है। भारत सरकार खामोश है। भारत के सेना प्रमुख ने भी कहा, 'चीन यहां रहने के लिए है'। प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री चुप क्यों हैं? चीनी घुसपैठ के निहितार्थ अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले देपसांग और दौलत बेग ओल्डी सेक्टर पर सरकार कुछ साफ नहीं बता रही है। खासकर, जब पीएलए, भारत के लिए दो अत्यंत रणनीतिक और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में डी-एस्केलेशन पर चर्चा करने के लिए तैयार नहीं है।
अगस्त में 12वें दौर की सैन्य वार्ता के बाद, इस बात पर आपसी सहमति बनी थी कि गोगरा क्षेत्र से दोनों देशों के सैनिक पीछे हटेंगे। इससे विपरीत चीन को दौलत बेग ओल्डी सेक्टर के साथ बड़े पैमाने पर सेना को मजबूत करने का मौका मिल गया। वहां भारी संख्या में पीएलए ने अपने सैनिक तैनात कर दिए, बल्कि हथियार प्रणाली को भी उन्नत कर लिया। वहां पर अब उन्नत एस-400 वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली भी मौजूद है। इसे डेमचोक सेक्टर के साथ तैनात किया गया है। यह 400 किमी के क्षेत्र में हवाई जहाजों के लिए खतरा है। यहां से लगभग पूरा जम्मू और कश्मीर और लद्दाख कवर हो सकता है।