कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शनिवार को बताया कि उन्होंने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को राज्य के सियासी घटनाक्रम और राज्यपाल की ओर से उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मंजूरी के बारे में विस्तार से बताया। राज्यपाल के इस कदम को उन्होंने संविधान के खिलाफ और अवैध करार दिया।
उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल में राज्यपाल की ओर से कुछ विधेयकों को सरकार को वापस भेजे जाने के मुद्दे पर चर्चा की जाएगी और फिर आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उप मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार और कई वरिष्ठ मंत्रियों ने शुक्रवार को नई दिल्ली में कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की।
सिद्धारमैया ने पत्रकारों से कहा, हम दिल्ली अपनी पहल पर गए थे। डी.के. शिवकुमार और मैंने कांग्रेस आलाकमान को राज्य की राजनीतिक घटनाओं, खासतौर से मुडा मामले को लेकर विपक्ष की पदयात्रा (बंगलूरू से मैसूर) के बारे में बताया कि हमने इसका राजनीतिक तरीके से कैसे सामना किया।
उन्होंने कहा, हमने उन्हें (शीर्ष नेतृत्व) सरकार की स्पष्ट स्थिति के बारे में बताया कि मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने को राज्यपाल की मंजूरी संविधान के खिलाफ और अवैध है। उन्होंने इसे अदालत में चुनौती देने की बात कही। हमने यह भी बताया कि मंत्रिमंडल और विधायिका ने इस फैसले की निंदा की है। हमने राज्यपाल के फैसले को कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
उनसे जब राज्यपाल के खिलाफ राष्ट्रपति से शिकायत करने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, अभी नहीं..लेकिन सभी विकल्प खुले हैं। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 16 अगस्त को सिद्धारमैया के खिलाफ मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (मुडा) मामले में मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी।
राज्यपाल ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17ए और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 218 के तहत कानूनी कार्रवाई की मंजूरी दी थी। इसके बाद सिद्धारमैया ने राज्यपाल के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।