महाराष्ट्र में आरक्षण को लेकर मराठा-पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के बीच विवाद बढ़ता दिखाई दे रहा है। एनसीपी (अजित गुट) के नेता व खाद्य आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल मराठा समाज को कुनबी मराठा का प्रमाणपत्र देने पर भड़क उठे। वहीं, राज्य के ओबीसी नेताओं ने गोलबंदी शुरू कर दी है।
महाराष्ट्र सरकार सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संदीप शिंदे समिति के माध्यम से अभिलेखों की जांच पड़ताल कर कुनबी मराठा का प्रमाणपत्र जारी कर रही है। छगन भुजबल कह रहे हैं कि कुनबी के नाम पर मराठा समाज के लोगों को पिछले दरवाजे से आरक्षण का प्रमाणपत्र बांटकर ओबीसी आरक्षण को हड़पा जा रहा है। हम अलग से मराठा आरक्षण का समर्थन करते हैं, लेकिन ओबीसी घटकों के साथ अन्याय नहीं होने देंगे। इसको लेकर मंगलवार को मुंबई में भुजबल के सरकारी आवास पर ओबीसी नेताओं की बैठक हुई, जिसमें सभी ने भुजबल के रुख का समर्थन किया। वहीं, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ बैठक के बाद एनसीपी (अजित गुट) के विधायक प्रकाश अन्ना शेंडगे ने कहा कि मराठा समाज को कुनबी मराठा के नाम पर प्रमाणपत्र जारी करने का हम विरोध करते है।
शिंदे समिति अवैध, पिछड़े नहीं हैं मराठा : प्रकाश
एनसीपी (अजित गुट) के विधायक प्रकाश अन्ना शेंडगे ने कहा कि शिंदे समिति अवैध है। कोई समिति किसी की जाति नहीं बदल सकती और न ही किसी को पिछड़ा बता सकती है। हम इसे सांविधानिक रूप में चुनौती देंगे। दिवाली बाद ओबीसी समाज अपनी ताकत दिखाएगा। पहला सम्मेलन उस जालना जिले में होगा जहां मनोज जरांगे पाटिल ने मराठा आरक्षण के लिए अनशन की शुरुआत की। उसके बाद 26 को हिंगोली में सम्मेलन किया जाएगा।
मराठों के खिलाफ रची जा रही साजिश : जरांगे