न्यायमूर्ति पी वी कुन्हीकृष्णन ने जेल महानिदेशक को जांच करने और तीन सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। यह आदेश एक आरोपी के पिता की याचिका पर आया है, जिन्होंने दावा किया था कि उनके बेटे और मादक पदार्थ मामले के अन्य आरोपियों को जेल के कुछ अधिकारी शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।
याचिकाकर्ता ने वकील पी वी जीवेश के जरिए दायर अपनी याचिका में उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी व्यक्तियों को उन बयानों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर करने के लिए प्रताड़ित किया गया था कि उनके पास मादक पदार्थ थे, जैसा कि पुलिस ने दावा किया है।
एक अगस्त को पुलिस ने कथित तौर पर एक गुप्त सूचना के आधार पर सिंथेटिक ड्रग्स रखने के संदेह में पांच युवकों को गिरफ्तार किया था। नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। पांच आरोपियों में से एक तामीर जिफरी (30 वर्षीय) की हिरासत के दौरान कथित तौर पर पुलिस यातना के कारण मौत हो गई थी।
याचिकाकर्ता अबूबकर के वी ने जेल अधिकारियों और राज्य पुलिस द्वारा हिरासत में आरोपी को कथित रूप से प्रताड़ित किए जाने की जांच की मांग की है। उनकी याचिका में हिरासत में बंद चारों आरोपियों की तत्काल चिकित्सा जांच की भी मांग की गई है।
पुलिस ने दावा किया था कि आरोपियों को 18.14 ग्राम एमडीएमए के साथ हिरासत में लिया गया था। हिरासत में कथित प्रताड़ना के सिलसिले में तनूर पुलिस थाने के आठ पुलिस अधिकारियों को जांच लंबित रहने तक निलंबित कर दिया गया था। केरल सरकार ने बाद में यह मामला सीबीआई को सौंप दिया था।