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Coimbatore Blast: पुलिस ने भाजपा प्रमुख के आरोपों को किया खारिज, कहा- मामले को NIA को सौंपने में नहीं हुई देरी

Sun, 30 Oct 2022 07:28 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई

सार

पुलिस ने भाजपा प्रमुख के आरोपों का जवाब देते हुए कहा, कोयंबटूर कार विस्फोट मामले को एनआईए को सौंपने में कोई देरी नहीं हुई है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अन्नामलाई ने कहा, राज्य पुलिस सत्तारूढ़ डीएमके के अनुरूप व्यवहार कर रही है।
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Tamil Nadu BJP chief K Annamalai - फोटो : ANI
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विस्तार
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तमिलनाडु पुलिस ने कोयंबटूर कार विस्पोट मामले को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपने में देरी के आरोपों का खंडन किया। ये आरोप भाजपा प्रमुख के. अन्नामलाई की ओर से लगाया गया था। पुलिस ने उनसे कहा कि भाजपा नेता उनके विभाग को बदनाम करने के लिए अफवाहों को फैलाना बंद करें। 

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पुलिस ने भाजपा प्रमुख के आरोपों का जवाब देते हुए कहा, कोयंबटूर कार विस्फोट मामले को एनआईए को सौंपने में कोई देरी नहीं हुई है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अन्नामलाई ने कहा, राज्य पुलिस सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़कम (डीएमके) के अनुरूप व्यवहार कर रही है। 

के. अन्नामलाई ने कहा, "मैं तमिलनाडु पुलिस के मेहनती भाइयों और बहनों का सबसे ज्यादा सम्मान करता हूं, लेकिन हमारी राज्य पुलिस के डीजीपी और एडीजीपी डीएमके पार्टी के विस्तार की तरह व्यवहार करते हैं। पुलिस ने भाजपा प्रमुख पर 'तथ्यात्मक रूप से गलत बयान' देने का आरोप लगाया है।" 
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एक आधिकारिक बयान में पुलिस ने कहा, "भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई लगातार तमिलनाडु पुलिस को बदनाम कर रहे हैं। जब सिलेंडर और कार के बारे में जांच चल रही है, अन्नामलाई लगातार जांच में हस्तक्षेप कर रहे हैं। पुलिस ने आरोप लगाया कि अन्नामलाई जांच को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।" 

बयान में आगे कहा गया, "अन्नामलाई का आरोप है कि हमने इस मामले को देर से एनआईए को भेजा है। जब इस प्रकार की घटनाएं होती हैं, तो केवल स्थानीय पुलिस मामले को दर्ज करती है और आगे की जांच करती है। सभी राज्य इस प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं। कानून यही कहता है।"

इसमें आगे कहा गया है, "जब यूएपीए लगाया जाता है या कुछ मामले की धारा एनआईए अधिनियम, 2008 के तहत आती है, तो राज्य सरकार तुरंत केंद्र को बताती है। फिर मामले के अनुसार पंद्रह दिनों के भीतर केंद्र मामलों को एनआईए को ट्रांसफर कर सकता है। एनआईए से राय मिलने पर केंद्र सरकार को मामले को संभालने में महीनों लग जाते हैं। तब तक राज्य पुलिस मामले को संभालती है।" 

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