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देश में घट रहा कोयले का स्टॉक:  क्या आम लोगों पर पड़ेगा असर? मंत्री ने दिया ये जवाब

Mon, 28 Sep 2026 05:25 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सरकार ने बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए कोयले से चलने वाले करीब 112 कैप्टिव बिजली संयंत्रों को 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक पूरी क्षमता से चलाने का निर्देश दिया है। इसके लिए बिजली अधिनियम की धारा 11 के तहत मिले आपातकालीन अधिकारों का इस्तेमाल किया गया है।
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जी किशन रेड्डी (फाइल) - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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देश के करीब आधे ताप बिजली संयंत्रों में कोयले की कमी होने की जानकारी सामने आई है। 24 सितंबर तक देश के 190 बिजली संयंत्रों में से 80 में कोयले का भंडार तय जरूरत के 25 फीसदी से भी कम रह गया था। इन संयंत्रों में कुल 2.23 करोड़ टन कोयला उपलब्ध था।

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26 सितंबर तक गंभीर रूप से कम भंडार वाले संयंत्रों की संख्या घटकर 77 हो गई, लेकिन इनका कुल कोयला भंडार भी कम होकर 2.198 करोड़ टन रह गया। 31 अगस्त को इन संयंत्रों के पास 2.9 करोड़ टन कोयला था। इस तरह करीब एक महीने में भंडार में 24 फीसदी की कमी आई है। देश के बिजली संयंत्रों के पास फिलहाल करीब सात दिन की जरूरत के बराबर कोयला बचा है। यह तय जरूरत का करीब 37 फीसदी है।

हालांकि, केंद्रीय कोयला एवं खनन मंत्री जी. किशन रेड्डी ने सोमवार को कहा कि बिजली संयंत्रों में कोयले की कमी नहीं है। सड़क और रेल के जरिये पर्याप्त कोयला भेजा जा रहा है। किसी अस्थायी आपूर्ति व्यवधान को कोयले की कमी के तौर पर देखना सही नहीं होगा और मौजूदा स्थिति सामान्य है। कमजोर मानसून से पनबिजली उत्पादन में कमी आई है। वहीं बारिश के कारण कोयला खनन प्रभावित होने से थर्मल पावर की मांग करीब 12-15 फीसदी बढ़ी है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि कोयला आपूर्ति को लेकर फिलहाल कोई तनाव नहीं है।
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कैप्टिव संयंत्रों को क्षमता के साथ चलाने के निर्देश
सरकार ने बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए कोयले से चलने वाले करीब 112 कैप्टिव बिजली संयंत्रों को 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक पूरी क्षमता से चलाने का निर्देश दिया है। इसके लिए बिजली अधिनियम की धारा 11 के तहत मिले आपातकालीन अधिकारों का इस्तेमाल किया गया है। इस प्रावधान के तहत असाधारण परिस्थितियों में सरकार बिजली उत्पादन बढ़ाने का आदेश दे सकती है।

सरकारी निर्देश के मुताबिक, ये संयंत्र अपनी कैप्टिव जरूरत पूरी करने के बाद बची बिजली बिजली एक्सचेंजों के जरिये बेच सकेंगे। इसके लिए लागू बाजार नियमों और प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। देश में सितंबर के दौरान बिजली की मांग ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। 10 सितंबर को अधिकतम मांग 269 गीगावॉट पहुंची, जो सितंबर में अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। इस साल मई में अधिकतम मांग 270 गीगावॉट दर्ज की गई थी।

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