पी चिदंबरम ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को गलत बताया, लेकिन इसे तमिलनाडु चुनाव के नतीजे की एकमात्र वजह मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वोटों में हेरफेर के दावे को विपक्ष को साबित करना होगा। एसआईआर को लेकर उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और आगे की कार्रवाई पर कांग्रेस-इंडिया गठबंधन की बैठक में फैसला होने की बात कही। साथ ही उन्होंने 13.3 करोड़ कथित रूप से हटाए गए नाम बहाल करने और नियमित वार्षिक पुनरीक्षण व्यवस्था लौटाने की मांग रखी। उन्होंने और क्या-क्या कहा है? जानिए...
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के दावे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मतदाताओं के नाम हटाना गलत था और जिन लोगों के नाम हटाए गए, उन्हें सूची में शामिल किया जाना चाहिए था। लेकिन चिदंबरम ने यह मानने से इनकार किया कि सिर्फ नाम हटाए जाने की वजह से टीवीके की जीत और डीएमके की हार हुई। उन्होंने कहा कि चुनाव में वोटों में हेरफेर के दावे को विपक्ष को साबित करना होगा।
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चिदंबरम ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची पर क्या-क्या कहा?
चिदंबरम ने देशभर में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर भी कांग्रेस का रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ आगे की रणनीति कांग्रेस कार्यसमिति और इंडिया गठबंधन की बैठकों में तय होगी। इसमें संसद में उन्हें हटाने का प्रस्ताव लाने जैसे विकल्पों पर फैसला हो सकता है। यह विवाद ऐसे समय चल रहा है जब मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और नए मतदाताओं के लिए आवेदन पत्र में बदलाव जैसे मुद्दों को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठ रहे हैं।
चुनाव आयोग को लेकर बवाल क्यों?
चिदंबरम का बयान चुनाव आयोग के भीतर मतदाता सूची के पुनरीक्षण, नाम हटाने और जोड़ने से जुड़े कुछ फैसलों और निर्देशों पर मतभेद की खबरों के बीच आया है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन मतभेदों को लेकर कहा है कि किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय आना सामान्य बात है। आयोग के मुताबिक, उसके सभी आदेश कानूनी आधार रखते हैं और तय वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत जारी किए जाते हैं। यानी एक तरफ विपक्ष चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं आयोग अपने फैसलों को कानूनी प्रक्रिया के तहत बता रहा है।
क्या चिदंबरम ने दोबारा चुनाव कराने की मांग की?
कांग्रेस नेता चिदंबरम ने तमिलनाडु में दोबारा चुनाव कराने की मांग को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि संविधान पूरे हो चुके चुनावों में दोबारा चुनाव कराने की अनुमति नहीं देता। इसके बजाय उन्होंने एसआईआर और मतदाता सूची से जुड़े दूसरे कदमों में बदलाव की मांग रखी। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों में एसआईआर तत्काल रोका जाना चाहिए और कथित तौर पर हटाए गए मतदाताओं के नाम वापस जोड़े जाने चाहिए।
पूरे विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा क्या?
कांग्रेस नेता ने कहा कि देशभर में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए हैं और कारैकुडी में भी विरोध प्रदर्शन किया गया। उन्होंने 20 राज्यों में कथित तौर पर हटाए गए 13.3 करोड़ नामों को बहाल करने की मांग उठाई, खास तौर पर बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा और पश्चिम बंगाल का जिक्र किया। हालांकि, तमिलनाडु चुनाव के संदर्भ में उनका रुख अलग है।