असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा
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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि बाल-विवाह को समाप्त करने के लिए कानून बनाए गए हैं, लेकिन इसे रोकने के लिए शिक्षा ही एकमात्र उपाय है। उन्होंने यह भी कहा कि बाल-विवाह को समाप्त करने के लिए व्यावसायिक शिक्षा भी बहुत बड़ी भूमिका निभाती है। व्यावसायिक शिक्षा लड़कियों को रोजगार पाने में सक्षम बनाती है, जो माता-पिता के साथ-साथ लड़कियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनती है।
मुख्यमंत्री यहां लोक सेवा भवन में सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में निजुत मोइना योजना शुरू करने के बाद सभा को संबोधित कर रहे थे। उच्च शिक्षा में लड़कियों का नामांकन बढ़ाने और बाल विवाह के खिलाफ लड़ने के लिए मासिक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। एक शैक्षणिक वर्ष में 10 महीने के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी। उच्चतर माध्यमिक के पहले वर्ष में एक छात्रा को 10 हजार रुपये मिलेंगे, यानी 10 महीने तक हर महीने 1 हजार रुपये मिलेंगे। स्नातक स्तर पर हर साल 12,500 रुपये यानी हर महीने 1,250 रुपये और पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर हर साल 25,000 रुपये यानी 10 महीने तक हर महीने 2,500 रुपये मिलेंगे। इस साल 10 अक्तूबर से छात्राओं के खाते में डीबीटी के जरिये सीधे रकम भेजी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन से चार वर्षों में इस योजना के तहत 10 लाख छात्राओं को लाया जाएगा। इस योजना का एक सामाजिक संदेश बाल विवाह को खत्म करना है।
असम में बिना भ्रष्टाचार लाखों युवाओं को मिली सरकारी नौकरी: सरमा
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि राज्य में लाखों युवाओं को सरकारी नौकरी मिली और भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं लगा। डेरगांव में असम वन रक्षक बल की पासिंग आउट परेड में मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी रही। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार में बड़ी शैक्षिक और गुणात्मक पीढ़ी सरकारी नौकरी से वंचित थी। मैनें 2001-2004 तक विश्लेषण के बाद पाया कि असम पुलिस में 30-35 फीसदी भर्तियां समुदाय विशेष से की जाती हैं। इसके बाद असम सरकार पुलिस और वन रक्षक बलों में भर्ती में हर समुदाय, धर्म और जाति के लोगों को प्राथमिकता दे रही है।ॉ