पुणे में समय पर इलाज न मिलने के चलते हुई गर्भवती महिला की मौत के मामले को महाराष्ट्र सरकार ने गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल जैसी घटनाओं को रोकने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाएगी। इसके लिए मसौदा तैयार करने पर काम किया जा रहा है। वहीं, घटना के बाद अस्पताल ने 'नो डिपॉजिट नीति' की घोषणा की है।
भाजपा एमएलसी अमित गोरखे के निजी सचिव की गर्भवती पत्नी तनीषा भिसे को दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल ने 10 लाख रुपये जमा न करने पर भर्ती करने से इनकार कर दिया था। बाद में, एक अन्य अस्पताल में भिसे ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। हालत बिगड़ने के बाद उसकी मौत हो गई। गर्भवती महिला की मौत के बाद अस्पताल राजनीतिक दलों और नागरिक समूहों के निशाने पर है। इसके अलावा, भिसे परिवार और भाजपा एमएलसी गोरखे ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जांच के लिए गठित की समिति, जिम्मेदारों पर होगी सख्त कार्रवाई
इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री फडणवीस ने शनिवार को प्रेस वार्ता की। इस दौरान उन्होंने कहा कि गलतियों को सुधारने की जरूरत है। सीएम ने कहा कि वह मृतक के परिवार से मिले हैं। मैंने उन्हें आश्वासन दिया है कि घटना की जांच के लिए एक समिति गठित की गई है। इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सीएम ने आगे कहा कि इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए राज्य सरकार एसओपी पर काम कर रही है। चैरिटी कमिश्नर कार्यालय को इस संबंध में एक ज्ञापन दिया जाएगा।
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पूरे धर्मार्थ अस्पताल प्रणाली को एक मंच पर लाने का हो रहा प्रयास
कई धर्मार्थ अस्पतालों के खिलाफ शिकायतों के बारे में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान धर्मार्थ आयुक्त को अतिरिक्त शक्तियां देने के लिए संशोधन किए गए थे। हमारा प्रयास पूरे धर्मार्थ अस्पताल प्रणाली को एक मंच पर लाना है, ताकि बिस्तर आवंटन में पारदर्शिता आ सके और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। इसकी निगरानी के लिए हम सीएम के चिकित्सा सहायता प्रकोष्ठ को भी इस प्रणाली से जोड़ने की योजना बना रहे हैं।
गलतियों को सुधारने की जरूरत: सीएम
सीएम फडणवीस ने आगे कहा कि अस्पताल को मंगेशकर परिवार के भारी प्रयासों के बाद बनाया गया था, लेकिन कुछ गलतियां हुई हैं, जिन्हें सुधारने की जरूरत है। समिति की ओर से कुछ प्राथमिक निष्कर्ष हैं। हालांकि, जब तक निष्कर्ष नहीं मिल जाते, तब तक टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा, 'मैं यह नहीं कह रहा हूं कि अस्पताल द्वारा किया गया सब कुछ गलत था, लेकिन हाल की घटना वास्तव में असंवेदनशील प्रकृति की थी। अगर वे गलती को सुधारने के लिए काम कर रहे हैं, तो मैं इसका स्वागत करता हूं।'
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अब इमरजेंसी वाले मरीजों से जमा राशि नहीं लेगा अस्पताल
इससे पहले दिन में, अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. धनंजय केलकर ने एक खुला पत्र जारी किया, जिसमें कहा गया है कि अस्पताल के शुरुआती वर्षों में किसी से भी जमा राशि नहीं ली गई। जैसे-जैसे गंभीर मामलों की संख्या और उपचारों की लागत बढ़ी, अस्पताल ने कुछ उच्च लागत वाले मामलों में जमा राशि लेना शुरू कर दिया। हालांकि, कल की घटना को देखते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया है। अस्पताल अब आपातकालीन विभाग के माध्यम से प्रवेश करने वाले मरीजों से कोई जमा राशि नहीं लेगा। इस प्रस्ताव में आपातकालीन प्रसव और बाल चिकित्सा आपात स्थिति शामिल हैं। इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
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