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स्मृति शेष: परंपरा और चलन को बदल देने वाली शास्त्रीय गायिका थीं प्रभा अत्रे, अंतिम सांस तक गाना चाहती थीं

Sun, 14 Jan 2024 06:31 AM IST
गुलाम अहमद अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

मशहूर शास्त्रीय गायिका प्रभा अत्रे (92) का शनिवार सुबह पुणे में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में उन्हें भर्ती कराया, पर तब तक देर हो चुकी थी। यूपी के किराना घराने की वरिष्ठ गायिका को 1990 में पद्मश्री, 2002 में पद्मभूषण, 2022 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया था। 13 सितंबर, 1932 को पुणे में जन्मीं प्रभा को किराना घराने की ख्याल गायकी के अलावा ठुमरी, दादरा, गजल, गीत, नाट्यसंगीत और भजन गायन में महारत थी।
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प्रभा अत्रे - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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प्रभा अत्रे, हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायकी में ऐसा नाम जो पहचान की मोहताज नहीं रही, अब शांत हो गई है। प्रभा अत्रे अंतिम सांस तक गाना चाहती थीं और ऐसा किया भी। वह मुंबई में एक कार्यक्रम के लिए निकलने वाली थीं, उसके चंद घंटे पहले ही उन्होंने अंतिम सांस ली। वह ऐसी गायिका थीं जिन्होंने रूढ़िवाद को खारिज किया और नई परंपरा और चलन को कायम किया।

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वह डॉक्टर, वकील या वैज्ञानिक बन सकती थीं, लेकिन गायिका बनना चुना। वह भी तब जब बहुत कम ही महिलाएं ऐसे क्षेत्रों में आती थीं। अत्रे ने दो अलग-अलग विषयों का अध्ययन किया। पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज से विज्ञान में स्नातक की डिग्री ली और वहीं के एक विश्वविद्यालय के कॉलेज से लॉ की भी डिग्री ली। वह किसी ऐसे परिवार में भी पैदा नहीं हुई थीं जहां संगीत पीढ़ियों पुरानी परंपरा रही हो या जिन्हें बचपन से ही संगीत का प्रशिक्षण मिला हो। वह जीवन के रास्ते में कहीं संगीत से टकराई और फिर उसी की हो कर रह गईं।

किराना घराने के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत गायिका ने कई रूढ़ियों को खारिज कर दिया। उनकी पृष्ठभूमि संगीत की नहीं थी और उन्होंने आंखें बंद कर किसी परंपरा को भी नहीं माना। वास्तव में, वह बहुत सरलता से कहती थीं कि गाना मेंढकों की चीरफाड़ करने या अपराधियों का बचाव करने से बेहतर है।
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...गायिका बनूंगी, सोचा नहीं था
पिछले साल जनवरी में पद्म विभूषण पुरस्कार प्राप्त करने के बाद प्रभा अत्रे ने कहा था, मैंने विज्ञान और फिर कानून की पढ़ाई की और मैंने कभी सपने में नहीं सोचा था कि गायिका बनूंगी। मेरे माता-पिता शिक्षा के क्षेत्र में थे और वास्तव में मेरी मां की बीमारी हमारे घर में संगीत लेकर आई। वह हारमोनियम सीखती थीं और मैं उनके पास बैठती थी। उन्होंने संगीत छोड़ दिया, लेकिन मैंने जारी रखा। अत्रे ऐसी गायिका थीं जिन्हें तीनों पद्म पुरस्कार मिले थे। 1990 में पद्म श्री और 2002 में पद्म भूषण पुरस्कार से उन्हें सम्मानित किया गया था।

किराना घराने को नया आयाम दिया : राष्ट्रपति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पोस्ट किया, महान भारतीय शास्त्रीय गायिका डॉ. प्रभा अत्रे के दुर्भाग्यपूर्ण निधन से दुखी हूं। उन्होंने किराना घराने को एक नया आयाम दिया और भारतीय शास्त्रीय संगीत को दुनिया भर में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें कई अन्य सम्मानों के अलावा तीनों पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। डॉ. अत्रे एक बहुआयामी व्यक्तित्व थीं वे विद्वान, संगीतकार, कलाकार और लेखक के रूप में विख्यात थीं।

समर्पण का प्रतीक था अत्रे का जीवन : मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रभा अत्रे के निधन पर शोक व्यक्त किया और कहा कि उनका जीवन उत्कृष्टता और समर्पण का प्रतीक था। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, डॉ. प्रभा अत्रे भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक महान हस्ती थीं। उनके काम की न केवल भारत में, बल्कि दुनियाभर में प्रशंसा की गई। उनका जीवन उत्कृष्टता और समर्पण का प्रतीक था। उनके प्रयासों ने हमारे सांस्कृतिक ताने-बाने को बहुत समृद्ध किया है। उनके निधन से  दुख हुआ। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदनाएं।

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