सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टीएस ठाकुर ने रविवार को एक बार फिर जज-जनसंख्या अनुपात पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि 1987 में भारतीय विधि आयोग ने तत्कालीन लंबित मामलों को प्रभावी तरीके से निपटाने के लिए 44 हजार जजों के होने का सुझा दिया था। आज देश में जजों की संख्या सिर्फ 18 हजार है।
सीजेआई ने कहा कि 30 वर्षों से हम कम ताकत के साथ काम कर रहे हैं। अगर आप लोगों की बढ़ती जनसंख्या के हिसाब से देखें तो लंबित मामलों के निपटारे के लिए अभी हमें 70 हजार जजों की जरूरत हो सकती है।