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CJI Chandrachud: सीजेआई चंद्रचूड़ बोले- मुझसे उम्मीदें ज्यादा हैं, लेकिन मैं यहां चमत्कार करने नहीं आया हूं

Tue, 15 Nov 2022 03:46 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा सीजेआई के रूप में नियुक्ति पर अभिनंदन के लिए आयोजित एक समारोह में न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि "तो, कुल मिलाकर, मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि मैं यहां चमत्कार करने नहीं आया हूं। मुझे पता है कि चुनौतियां अधिक हैं, शायद अपेक्षाएं भी अधिक हैं, और मैं आपके विश्वास की भावना का बहुत आभारी हूं, लेकिन मैं यहां चमत्कार करने के लिए नहीं हूं।’’
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भारत के प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़। - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने सोमवार को कहा कि वह जानते हैं कि उनसे काफी उम्मीदें हैं लेकिन वह यहां चमत्कार करने नहीं आए हैं। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि न्यायपालिका के प्रमुख के रूप में, वह सर्वोच्च न्यायालय में अपने सहयोगियों को देखेंगे और उनके अनुभव और ज्ञान से लाभ प्राप्त करेंगे, जिसका पारंपरिक रूप से उपयोग नहीं किया गया है।

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सीजेआई ने कहा कि उनका मानना है कि शीर्ष अदालत के न्यायाधीश जो बार से आए हैं, वे अपने साथ "ताजगी" लेकर आते हैं और यह बार और बेंच का एक अनूठा संयोजन है, जो शीर्ष अदालत में एक साथ आता है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा सीजेआई के रूप में नियुक्ति पर अभिनंदन के लिए आयोजित एक समारोह में न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि "तो, कुल मिलाकर, मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि मैं यहां चमत्कार करने नहीं आया हूं। मुझे पता है कि चुनौतियां अधिक हैं, शायद अपेक्षाएं भी अधिक हैं, और मैं आपके विश्वास की भावना का बहुत आभारी हूं, लेकिन मैं यहां चमत्कार करने के लिए नहीं हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि हर दिन मेरा आदर्श वाक्य है कि अगर यह मेरे जीवन का आखिरी दिन होता, तो क्या मैंने दुनिया को एक बेहतर जगह छोड़ दी है। मैं हर दिन खुद से यही पूछता हूं।’’ न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने नौ नवंबर को 50वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में पदभार संभाला था और वह 10 नवंबर, 2024 तक इस पद पर रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट के जज 65 साल की उम्र में सेवानिवृत्त होते हैं।
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एससीबीए समारोह में बोलते हुए सीजेआई ने कहा कि उनका मानना है कि उनका प्रत्येक सहयोगी, जिनके साथ वह हर दिन सहयोग करते हैं, वह उनके जैसा अच्छा या उनसे बेहतर हो और उनके अनुभव भी उनके जितने अच्छे या उनसे बेहतर हों। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, इसलिए, मैं अपने सहयोगियों के अनुभव का फायदा उठाऊंगा। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जो उच्च न्यायालयों से आते हैं, उनके साथ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और मुख्य न्यायाधीश के रूप में वर्षों का अनुभव है और उनका सामूहिक अनुभव एवं ज्ञान कुछ ऐसा है जिसे हमने शीर्ष अदालत में पारंपरिक रूप से उपयोग नहीं किया है। उन्होंने कहा कि यह शिकायतों में से एक है या कहें हमारे कई सहयोगियों की आलोचनाओं में से एक है।

उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि मुझे इसे बदलना होगा और अपने सहयोगियों पर अधिक निर्भर रहना होगा, उनके अनुभव का उपयोग करना होगा और वह अनुभव संस्थान को मजबूत करने में योगदान देगा। उन्होंने कहा कि न्यायाधीश जो काम करते हैं वह बार और बेंच के बीच एक सहयोगात्मक प्रयास है। सीजेआई ने कहा कि उनका मानना है कि प्रधान न्यायाधीशों का सम्मान किया जाता है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे न्यायाधीश के रूप में बुनियादी कार्य करते हैं या नहीं।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश के रूप में आपको बहुत अधिक काम करना पड़ता है और मुझे पिछले कुछ दिनों से लगातार कहा जा रहा है कि आप जो न्यायिक कार्य करते हैं और समय को पार करने की जो आपकी प्रवृत्ति है उसमें कटौती करें, ताकि आप अपने प्रशासनिक कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सकें। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि एक न्यायाधीश के लिए उसका न्यायिक कार्य उसके जीवन का सबसे संतोषजनक पहलू है और इसमें कोई समझौता नहीं हो सकता। मेरा यही मानना है और मैं अगले दो साल तक इसी तरह अपनी कार्यप्रणाली को पूरा करने का इरादा रखता हूं।

सीजेआई ने कहा कि न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) आर भानुमति की तरह जिला न्यायपालिका से आने वाले शीर्ष अदालत के न्यायाधीशों के पास देश की कानूनी व्यवस्था की जमीनी हकीकत को संभालने का वर्षों का अनुभव है।

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