एक महीने पहले फेसबुक पर तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले में रहने वाले जेबिन चार्ल्स नाम के शख्स को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आपत्तिजनक तस्वीर पोस्ट करना भारी पड़ गया। इस पोस्ट के कारण अब उन्हें एक साल तक सोशल मीडिया से दूर रहना पड़ेगा। उन्होंने सोमवार को मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ में लिखित हलफनामा दिया। जिसके बाद उन्हें अग्रिम जमानत दी गई।
जस्टिस जीआर स्वामानाथन ने चार्ल्स के हलफनामे को रिकॉर्ड करते हुए कहा कि यदि वह इस एक साल में सोशल मीडिया इस्तेमाल करते हुए पाए गए तो अभियोजन पक्ष उनकी अग्रिम जमानत रद्द करने के लिए अदालत का रुख कर सकता है। जस्टिस स्वामीनाथन ने निर्देश दिया कि उन्हें न्यायिक न्यायालय में एक माफीनामा जमा कराना होगा।
चार्ल्स ने फेसबुक पर जब प्रधानमंत्री की तस्वीर पोस्ट की तो उसके अगले ही दिन भाजपा नेता नानजिल राजा ने वडेसरी पुलिस थाने में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। जिसके बाद यह मामला न्यायालय पहुंचा और उन्हें अग्रिम जमानत के लिए उच्च न्यायालय का रुख करना पड़ा।
अपने आवेदन में चार्ल्स ने अपने कृत्य पर खेद व्यक्त किया है और कहा कि उन्होंने उस तस्वीर को ब्लॉक कर दिया क्योंकि उन्हें अहसास हुआ कि किसी भी नागरिक के पास प्रधानमंत्री का अपमान करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि वह आपत्तिजनक तस्वीर को लेकर स्थानीय अखबार में माफीनामा जारी करने के लिए तैयार हैं।
चार्ल्स ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक अवलोकन का हवाला दिया जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि फेसबुक पर राय देना, जो एक सार्वजनिक मंच है, अपराध नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने कृत्य पर खेद व्यक्त किया है। उनके खिलाफ 11 अक्तूबर को भारतीय दंड संहिता की धारा 505 (2) और आईटी अधिनियम 2000 की धारा 67बी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।