नागरिकता (संशोधन) विधेयक आज राज्यसभा में पास हो गया। इसे लेकर राजनीतिक दल आमने सामने आ हए। इस पर सभी की नजरें टिकी रहीं। खासतौर पर वे लोग जो भारत में रह रहे हैं, लेकिन अभी तक उनके पास यहां की नागरिकता नहीं है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में इस विधेयक पर बहस के दौरान कहा था कि तीन देश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ धार्मिक उत्पीड़न होता है। इस बाबत दिल्ली के मजनू का टीला इलाके में आठ साल से रह रहे वे हिंदू शरणार्थी, जो पाकिस्तान से आए थे, उन्होंने भी केंद्रीय गृह मंत्री के बयान का समर्थन किया है। हिंदू शरणार्थियों का कहना है कि पाकिस्तान में हिंदुओं के वोट लेने के बाद कहा जाता है कि अपना मजहब छोड़ दो। मदरसों में दूसरी कक्षा के बाद जबरदस्त धार्मिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है।
पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थी सोना दास और दौलतराम का कहना है कि उनकी कई पीढ़ियां तो वहीं रह रही थी। देश का विभाजन हुआ, हम भारत में नहीं आ सके। उस वक्त विश्वास दिलाया गया कि तुम यहीं रहो। तुम्हारे साथ गलत नहीं होगा। हमने भी उनकी बात मान ली। कुछ समय बाद पाकिस्तान के हुकमरानों का असली चेहरा सामने आया। वहां पर हिंदुओं का उत्पीड़न शुरू हो गया।