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गृहमंत्री अमित शाह ने विरोधियों को दिया करारा जवाब, शिवसेना पर कसा तंज

Wed, 11 Dec 2019 09:40 PM IST
देव कश्यप शशिधर पाठक, नई दिल्ली

सार

  • कैसे रात भर में बदल गया शिवसेना का स्टैंड
  • हम चुनावी राजनीति के लिए इस तरह की राजनीति नहीं करते, चुनाव अपने दम पर लड़ते हैं
  • पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का कल का बयान और आज सदन में कांग्रेस के नेताओं के बयान एक समान
  • जब पाकिस्तान की बात करता हूं को विपक्ष को गुस्सा क्यों आता है
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राज्यसभा में अमित शाह - फोटो : BJP Twitter
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विस्तार
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नागरिकता (संशोधन) विधेयक-2019 पर चर्चा का जवाब देते हुए केन्द्रीय गृहमंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने जहर बुझे तीरों से विरोधियों को जमकर लहूलुहान किया। अमित शाह तंज कसने में माहिर हैं। इस दौरान उन्होंने विपक्ष को चिढ़ाने, ताना कसने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने विपक्ष को चेताया भी नरेन्द्र मोदी सरकार चुनावी राजनीति के लिए नागरिकता (संशोधन) विधेयक जैसे बिल नहीं लाया करती। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने दम पर चुनावी राजनीति करती है और उनके नेता देश के एक लोकप्रिय नेता हैं।

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शिवसेना, कांग्रेस को ताना कसकर दिया जवाब
शिवसेना के नेता संजय राउत को जवाब देते हुए गृहमंत्री सदन में कहा कि उन्हें नहीं पता जो रात भर में नागरिकता (संशोधन) विधेयक को लेकर शिवसेना का स्टैंड बदल गया। अमित शाह ने पर बड़ा ताना मारते हुए कि जब वह पाकिस्तान का नाम लेते हैं तो विपक्ष के नेताओं को गुस्सा क्यों आता है? शाह यही नहीं रुके उन्होंने आक्रामक लहजा अपनाते हुए कहा कि कल तक जो बात पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान कर रहे थे आज वही भाषा सदन के कुछ नेता और कांग्रेस के नेता बोल रहे हैं।

इसी तरह से बिल के प्रावधानों को लेकर और भविष्य में कांग्रेस के नेताओं द्वारा उठाए गए कदमों, बयानों का जिक्र करके गृहमंत्री ने कांग्रेस के नेताओं को आइना दिखाया। इतना ही नहीं वह जवाब देने के दौरान भी एक अंतराल पर लगातार पी चिदंबरम को चिदंबरम साहब..चिदंबरम साहब कहकर संबोधित करते रहे। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को यह विधेयक इसलिए लाना पड़ा क्योंकि पहले की सरकार, सरकार चलाते रहो की रणनीति पर चलती रही, जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार देश की समस्याओं का समाधान करने के इरादे से काम कर रही है।
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अमित शाह ने कांग्रेस को दिलाया याद
यूपीए सरकार के समय राजस्थान की मुख्यमंत्री ने पाकिस्तान से आए 13 हजार हिन्दू, सिख समुदाय के लोगों को नागरिकता देने का अनुरोध किया था और यूपीए की सरकार ने दिया था। केन्द्र की मोदी सरकार ने पिछले पांच साल में 566 मुस्लिम नागरिकों को भारत की नागरिकता दी है। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर अत्याचार को लेकर चिंता जताई थी और उन्हें भारतीय नागरिकता देने पर विचार करने का जिक्र किया था।

26 सितंबर 1947 को महात्मा गांधी ने कहा था कि विभाजन के बाद जो हिन्दू और सिख समुदाय के लोग पाकिस्तान से यहां आना चाहते हैं, भारत उन्हें नागरिकता और उन्हें रहने का पूरा अधिकार देगा। कांग्रेस पार्टी ने भी प्रस्ताव पास किया था कि पाकिस्तान के गैर मुस्लिमों को पूर्ण सुरक्षा दी जाएगी। आठ अप्रैल 1950 को देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के हुक्मरान लियाकत अली खान के बीच में हुए समझौते का भारत ने तो पालन किया, यहां मुस्लिम को अधिकार, सम्मान सब मिला, लेकिन पाकिस्तान ने इसका पालन नहीं किया। वहां मुस्लिम को छोड़कर अन्य सब घटते गए, उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ।

बताया कांग्रेस और भाजपा का फर्क
अमित शाह ने कहा कि जो प्रताडि़त हैं, उन्हें सम्मान देना, नागरिक बनाना भाजपा और मोदी सरकार की पंथ निरपेक्षता है। जबकि कांग्रेस और विपक्ष की पंथ निरपेक्षता केवल मुसलमान तक सीमित है। शाह ने कहा कि धर्म की राजनीति वह नहीं कांग्रेस करती है। देश का बंटवारा भी धर्म के आधार पर हुआ था। कांग्रेस पार्टी ने इसे स्वीकार किया था और इसलिए सरकार को नागरिकता(संशोधन) विधेयक लाना पड़ा। अमित शाह ने कहा कि विपक्ष तीन तलाक, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हजाने और नागरिकता (संशोधन) विधेयक को मुस्लिम के खिलाफ मान रही है, जबकि ऐसा नहीं है।

हाजिर जवाब अमित शाह
अमित शाह ने राज्यसभा में नागरिकता(संशोधन) विधेयक पर सदस्यों की आपत्ति का जवाब देते हुए खूब हाजिर जवाबी दिखाई। उन्होंने पी. चिदंबरम और कपिल सिब्बल द्वारा विधेयक को संविधान की आत्मा के खिलाफ बताने पर भी जवाब दिया। अमित शाह ने कहा कि यह विधेयक संविधान की आत्मा, उसकी मूलभूत संरचना के अनुरुप है। अनुच्छेद 14 के समानता के अधिकार की व्यख्या करता है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 14 में रिजनेबल क्लासीफिकेशन(उचित वर्गीकरण) के आधार पर इसमें बदवा का उल्लेख है। अमित शाह ने कांग्रेस नेता और उच्चतम न्यायालय के दोनों वकीलों के कानूनी ज्ञान पर तंज कसते हुए इसका जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के दोनों वकील सदन को अदालत का हवाला देकर डरा रहे हैं।

क्यों लाए 5+1 प्रावधान?
केन्द्रीय गृहमंत्री ने कारण बताया कि 11+1 के स्थान पर पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश के गैर मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए क्यों 5+1 लाए। शाह ने कहा कि 5+1 के प्रावधान लागू होने के बाद 2014 तक तीनों देशों के नागरिक भारत में आए हैं, उन्हें अगले साल से नागरिकता दी जा सकेगी। वह जल्द ही सम्मानजनक जिंदगी जी सकेंगे। जबकि 11+1 लागू होने पर उन्हें 2025 तक का इंतजार करना पड़ता।

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