न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च की मस्जिद में हुई गोलीबारी में मारे गए 65 साल के महबूब खोखर को शनिवार को अहमदाबाद वापस लौटना था। उनके परिवार के सदस्यों ने रविवार को यह बताया। उसी दिन न्यूजीलैंड स्थित भारतीय दूतावास ने गोलीबारी में पांच भारतीयों की मौत की पुष्टि की थी जिसमें 50 लोगों की मौत हो गई थी।
जिन भारतीयों की मौत हुई उनमें से तीन गुजरात, एक तेलंगाना और एक केरल के रहनेवाले थे। भारतीय दूतावास ने ट्वीट में उनकी पहचान महबूब खोखर, रमीज वोरा, आसिफ वोरा, अनसी अलीबावा और ओजैर कादिर के तौर पर की है। खोखर गुजरात बिजली बोर्ड के सेवानिवृत्त कर्मचारी थे जो कभी अपनी नमाज नहीं छोड़ते थे।
खोखर अपने बेटे इमरान से मिलने के लिए न्यूजीलैंड गए थे जो वहां एक दशक से काम कर रहा है। खोखर के दामाद हाफिज ने बताया कि इमरान अपने पिता को मस्जिद में छोड़ने के बाद गाड़ी पार्क करने के लिए गए थे। इसी दौरान खोखर बंदूकधारी हमलावर के शिकार बन गए।
हाफिज ने बताया कि महबूब खोखर और उनकी पत्नी अख्तर बेगम अगले दिन शनिवार को अहमदाबाद लौटने वाले थे।
खोखर के एक दोस्त ने बताया, "हम उम्मीद कर रहे थे कि वह रविवार को नमाज के समय हमारे साथ होंगे। उनकी आकस्मिक मौत हमारे लिए एक आघात है। हमने कभी नहीं सोचा था कि वह वापस नहीं आएंगे।"
इस नरसंहार के दूसरे पीड़ित आसिफ वोहरा और उनके बेटे रमीज दोनों ही वडोदरा के रहने वाले थे। दोनों को शनिवार को मृत घोषित कर दिया गया था।
वडोदरा के सांसद रंजन भट्ट ने कहा, 'उनके परिवार के बहुत से सदस्य विदेश में बस चुके हैं। गुजरात सरकार ने न्यूजीलैंड के उच्चायुक्त से अनुरोध किया है कि आसिफ के भाई मोहसिन और रमीज की पत्नी के रिश्तेदार को प्राथमिकता के तौर पर वीजा दें।' खबरों के मुताबिक रमीज की पत्नी कुछ दिनों पहले ही एक बेटी की मां बनी हैं। उन्हें शुक्रवार को अस्पताल से छुट्टी मिलनी थी।
आसिफ और रमीज ने तय किया था कि वह नमाज अदा करने के बाद डिस्चार्ज की औपचारिकताओं को पूरा करेंगे। आसिफ और उनकी पत्नी एक महीने पहले ही अपने परिवार के नए सदस्य का स्वागत करने के लिए न्यूजीलैंड आए थे।