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नगालैंड गोलीकांड: 14 लोगों की मौत के बाद फिर उठी पूर्वोत्तर से अफस्पा कानून वापस लेने की मांग, जानिए पूरा मामला

Sun, 05 Dec 2021 09:11 PM IST
सुरेंद्र जोशी पीटीआई, गुवाहाटी/शिलांग

सार

पूर्वोत्तर के नागरिक संगठनों, अधिकार कार्यकर्ताओं व नेताओं ने वर्षों पुराने इस कानून को वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि सुरक्षा बल इस कानून में उन्हें मिली छूट का इस्तेमाल कर अत्याचार करते हैं। 
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नागालैंड पुलिस - फोटो : Twitter
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विस्तार
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नगालैंड में सुरक्षा बलों द्वारा 14 नागरिकों को कथित रूप से गोलियों से भून दिए जाने की घटना के बाद सशस्त्र बल (विशेषाधिकार कानून) 1958 को पूर्वोत्तर से वापस लेने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। 

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पूर्वोत्तर के नागरिक संगठनों, अधिकार कार्यकर्ताओं व नेताओं ने वर्षों पुराने इस कानून को वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि सुरक्षा बल इस कानून में उन्हें मिली छूट का इस्तेमाल कर अत्याचार करते हैं। आर्म्ड फोर्सेस स्पेशियल पावर कानून 'अफस्पा' असम, नगालैंड, मणिपुर, (इंफाल नगर निगम परिषद को छोड़कर), अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग, लोंगडिंग, तिरेप जिलों, असम से लगे अरुणाचल के आठ थाना क्षेत्रों में लागू है। 

उत्तर पूर्व के छात्र संघों के प्रमुख संगठन नार्थ ईस्ट स्टुडेंट्स आर्गनाइजेशन (NESO) ने मांग की है कि केंद्र सरकार को यदि उत्तर पूर्व के लोगों की चिंता है तो उसे यह कानून वापस ले लेना चाहिए। नेसो के अध्यक्ष सैमुअल बी. जिरवा ने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया तो यह क्षेत्र के लोगों को और अलग करेगा। 
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उन्होंने कहा कि नगालैंड के मोन में अतीत की त्रासदीपूर्ण यादें ताजा कर दी हैं। जिरवा ने कहा कि पूर्व में भी कई बार सुरक्षा बलों ने निर्दोष ग्रामीणों को सताया था। अलगाववादियों से निपटने के नाम पर अत्याचार किए गए। टिपरा के चेयरमैन प्रद्योत देब बर्मा ने कहा कि जो भी नगालैंड गोलीकांड के जिम्मेदारों को सजा दी जाना चाहिए और अफस्पा जैसे कानून वापस लिए जाना चाहिए।  

असम के राज्यसभा सदस्य व वरिष्ठ पत्रकार अजित कुमार भूयान ने कहा कि ग्रामीणों की हत्या सभी के लिए आंखें खोलने वाली घटना है। ऐसी घटनाएं अफस्पा के कारण होती हैं, जिसके नवीनीकरण का हम लंबे समय से विरोध कर रहे हैं। यह पहली घटना नहीं है, लेकिन उम्मीद करते हैं कि यह अंतिम हो। 

अखिल असम छात्रसंघ (AASU) के प्रमुख समुज्जल कुमार भट्टाचार्य ने कहा कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई जघन्य है यह माफ करने योग्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना ने बता दिया है कि सरकार क्षेत्र में शांति की इच्छुक नहीं है। उन्होंने मांग की कि पूर्वोत्तर के लोगों को बचाने के लिए अफस्पा को वापस लिया जाना चाहिए। 

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