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हिंद महासागर में बेलगाम चीन को रोकने के लिए यूएस ने भारत को दिया ये ऑफर

Thu, 19 Jan 2017 06:04 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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- फोटो : file photo
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दक्षिण चीन सागर ही नहीं हिंद महासागर में भी ड्रैगन बेखौफ होकर अपनी दखल और ताकत दोनों बढ़ा रहा है। भारत को चीन की इस बेतकल्लुफी और हिमाकत का जवाब देना चाहिए। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती दादागीरी पर अमेरिका ने चिंता जताई है साथ ही भारत सरकार को एक ऑफर भी दिया है।
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मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी नेवी के शीर्ष कमांडर एडमिरल हैरी हैरिस जूनियर ने हिंद महासागर में चीन की गतिविधियों को लेकर कहा है कि इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते दबदबे से भारत को चिंता करनी चाहिए। क्योंकि इस क्षेत्र में चीन की जैसी दखल है वैसी भारत की नहीं है। हैरी ने हालांकि चीनी नौसेना की गतिविधियों के बारे में कुछ नहीं कहा।

हैरी एक ऐसे क्षेत्र में अमेरिकी मिलिट्री ऑपरेशन के कमांडर हैं जोकि घरती के कुल क्षेत्रफल का 52 फीसदी भाग है।

हैरी ने कहा कि चीन के विमानवाहक युद्धपोत बे-रोकटोक विचरण करते हैं, उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। हैरी ने यह भी कहा कि अमेरीकी विमावाहक युद्धपोत चीन के विमान वाहक युद्ध पोतों से बेहतर है। इसकी वजह ये है कि अमेरिकी युद्धपोत दिन और रात दोनों में ऑपरेशन करने में सक्षम हैं। हैरी ने यह भी कहा कि भारत के पास भी विमानवाहक युद्धपोतों को ऑपरेट करने के मामले में चीन से बेहतर है क्षमता है।
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अमेरिका का ऑफर

हैरी ने कहा कि इस क्षेत्र में भारत और अमेरिका के साथ मिलकर चीनी युद्धपोतों और पनडुब्बियों पर नजर रख रहे हैं। चीनी युद्धपोतों की रियल टाइम गतिविधियों की सूचनाएं साझा की जा रही हैं।

भारत फिलहाल बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में चीनी पनडुब्बियों पर नजर रखने के लिए अमेरिका निर्मित पनडुब्‍बी रोधी हथियारबोइंग P8-I पर निर्भर करता है। हैरी के मुताबिक अगर भारत कम्‍युनिकेशंस कंपेटिबिलिटी एंड सिक्‍यॉरिटी एग्रीमेंट (COMCASA) पर हस्‍ताक्षर कर दे तो भारतीय और अमेरिकी नेवी के बीच सूचनाएं साझा करने के मामले पर काफी कुछ किया जाता है। इस संधि के तहत अमेरिका और उसके मिलिट्री पार्टनर देशों के बीच सैन्‍य सूचनाओं का सुरक्षित तरीके से आदान-प्रदान किया जाता है।

हैरी के मुताबिक P8 दुनिया का सर्वाधिक सक्षम पनडुब्‍बी रोधी युद्धक प्‍लेटफॉर्म है। भारत के पास P8-I है और अमेरिका के पास P8-A है। लेकिन तकनीकी अंतर की वजह से ये पूरी तरह सक्षम नहीं हैं। ऐसे भारत को अमेरिका के साथ संधि कर लेना चाहिए ताकि पूरी क्षमता का इस्‍तेमाल करते हुए हिंद महासागर में इस तरह की पनडुब्बियों पर निगाह रखी जा सके।
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'चीन-पाक संबंध चिंता का विषय'

चीन ने पिछले तीन वर्षों में हिंद महासागर में तमाम युद्धपोतों के साथ परमाणु क्षमता से लैस पनडुब्बियों को तैनात किया है। चीन इसके पीछे सोमालिया तट के पास समुद्री डाकुओं-लुटेरों से निपटने का कारण बताता है। 

भारतीय नेवी का मानना है कि चीन की हिंद महासागर में ये गतिविधियां भारत को सामरिक दृष्टि से घेरने की कोशिश है।

हैरी ने चीन-पाक संबंधों पर कहा कि चीन और पाकिस्‍तान के संबंध चिंता का विषय हैं। चीन का ताकतवर और समृद्ध होना उसके लिए कोई गलत बात नहीं है, वह अपनी ताकत आक्रामकता में बदलता है तो भारत और अमेरिका समेत तमाम देशों के लिए वह समस्या खड़ी करेगा।
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