सीमा पर तैनात जवान (फाइल फोटो)
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चीन ने पूर्वी लद्दाख के चुशुल क्षेत्र के सामने अतिरिक्त बलों को तैनात कर दिया है। ड्रैगन ने ऐसा तब किया है जब भारतीय सशस्त्र बलों की एक बड़ी संख्या ने थाकुंग से रेकिन ला तक लगभग सभी प्रमुख ऊंचाइयों वाले क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया। एक हफ्ते पहले भारतीय सेना के जवानों ने चीन की घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया था।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘दोनों पक्षों द्वारा सैनिकों की भारी तैनाती के साथ ही वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति तनावपूर्ण है। यह पूर्वी लद्दाख में एक टिंडरबॉक्स (तनाव का कारण) की तरह है।’ दोनों सेनाएं हजारों सैनिकों, टैंकों, बख्तरबंद वाहनों और हॉवित्जर तोपों के साथ एक-दूसरे के खिलाफ खड़ी हैं।
इसी बीच सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने गुरुवार को पूर्वी लद्दाख के चुशुल क्षेत्र का दौरा किया। जनरल नरवणे ने उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी और 14 कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह के साथ स्थिति का जायजा लिया। वह नई दिल्ली लौटने से पहले शुक्रवार सुबह क्षेत्र के उत्तर में कुछ अन्य फॉरवर्ड क्षेत्रों का भी दौरा करेंगे।
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भारत और चीन के बीच लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश के बीच पड़ने वाली 3,488 किलोमीटर एलएसी पर तनाव जारी है। ऐसे में भारतीय वायुसेना अध्यक्ष एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने हाशिमारा सहित पूर्वी क्षेत्रों में स्थित सीमावर्ती एयरबेस का बुधवार को दौरा किया और सैन्य तैयारियों की समीक्षा की।
किसी भी तरह की अप्रिय घटना से सावधान रहने और चीजों को नियंत्रण में रखने के लिए भारत और चीन दोनों ने संचार के लिए सैन्य बातचीत के विकल्प को खुला रखा हुआ है। चुशुल-मोल्डो सीमा पर गुरुवार को चौथे दिन ब्रिगेडियर स्तर की वार्ता हुई। हालांकि इस बैठक में कोई नतीजा नहीं निकला।