नई दिल्ली में स्थित चीनी दूतावास की ओर से आगामी 'कथित ताइवान के राष्ट्रीय दिवस' को लेकर एक पत्र भेजा गया है। इसमें कहा गया है, 'हम मीडिया के साथियों को याद दिलाना चाहते हैं कि दुनिया में केवल एक चीन है और हमारी सरकार पूरे चीन का प्रतिनिधित्व करने वाली एकमात्र वैध सरकार है।'
पत्र में कहा गया, 'ताइवान चीन के क्षेत्र का एक अखंड हिस्सा है... ऐसे सभी देशों को एक चीन नीति को लेकर उनकी प्रतिबद्धता का सम्मान करना चाहिए, जिनके चीन के साथ राजनयिक संबंध हैं, जो कि जो कि लंबे समय से चली आ रही भारत सरकार की आधिकारिक स्थिति भी है।
पत्र में आगे कहा गया, 'हम उम्मीद करते हैं कि ताइवान के सवाल पर भारतीय मीडिया भारत सरकार की आधिकारिक स्थिति को मानेगा और एक चीन के सिद्धांत का उल्लंघन नहीं करेगा। विशेष रूप से, ताइवान को 'देश' या चीन के ताइवान क्षेत्र के नेता को 'राष्ट्रपति' के रूप में नहीं बताया जाएगा।'
बता दें कि साल 1995 में भारत और ताइवान ने अपनी-अपनी राजधानियों में प्रतिनिधि कार्यालय स्थापित किए थे। हालांकि दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। नई दिल्ली में ताइवान का ताइपे इकनॉमिक एंड कल्चरल सेंटर है, जबकि भारत का ताइपे में इंडिया-ताइपे एसोसिएशन है।
मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि ताइवान ने कोविड-19 महामारी के कारण अपने राष्ट्रीय दिवस के लिए एक स्वागत समारोह रद्द कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस अवसर को चिह्नित करने के लिए केवल विज्ञापन और एक टीवी कार्यक्रम आयोजित होगा।
बता दें कि भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद को लेकर तनाव लगातार जारी है। भारतीय अधिकारी चीनी दूतावास के बयानों पर कड़ी नजर रख रहे हैं। माना जाता है कि चीन में भारतीय दूतावास को चीनी मीडिया इतना महत्व नहीं देता है जितना यहां चीनी दूतावास को दिया जाता है।