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Maharashtra: 'भारत के औपनिवेशिक आकाओं ने हमें संविधान नहीं दिया', नागपुर में बोले चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़

Sat, 11 Feb 2023 05:04 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागपुर

सार

प्रस्तावना का उल्लेख करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि प्रस्तावना संविधान का एक छोटा हिस्सा जरूर है लेकिन यह एक वजनदार हिस्सा है। जिसमें कहा गया है कि "हम भारत के लोग खुद को यह संविधान देते हैं"।
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सीजेआई चंद्रचूड़ - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को भारतीय संविधान को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। नागपुर में महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के पहले दीक्षांत समारोह में बोलते हुए उन्होंने कहा कि संविधान स्व-शासन, गरिमा और स्वतंत्रता का एक उल्लेखनीय घरेलू उत्पाद है। संविधान की व्याख्या कई लोग जहां प्रशंसात्मक शब्दों में करते हैं, वहीं कई अन्य इसकी सफलता के बारे में निंदक हैं।

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भारत के औपनिवेशिक आकाओं ने हमें संविधान नहीं दिया
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि भारत के औपनिवेशिक आकाओं ने हमें संविधान नहीं दिया बल्कि देश की स्थिति समझने वाले लोगों ने इसका निर्माण किया। चीफ जस्टिस ने कहा कि संविधान ने जबरदस्त प्रगति की है लेकिन अभी भी बहुत काम पूरा करने की जरूरत है और अतीत में मौजूद गहरी असमानता आज भी बनी हुई है जिसे हमें दूर करना होगा। उन्होंने कहा कि यदि कानून के युवा छात्रों और स्नातकों को संवैधानिक मूल्यों द्वारा निर्देशित किया जाता है तो वे असफल नहीं होंगे।

चीफ जस्टिस ने प्रस्तावना का किया उल्लेख
प्रस्तावना का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि प्रस्तावना संविधान का एक छोटा हिस्सा जरूर है लेकिन यह एक वजनदार हिस्सा है। जिसमें कहा गया है कि "हम भारत के लोग खुद को यह संविधान देते हैं"। यह बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के लोगों के प्रजा की स्थिति से नागरिकों की स्थिति में परिवर्तन को चिह्नित करता है। औपनिवेशिक आकाओं ने अनुग्रह के कार्य के रूप में हमें संविधान प्रदान नहीं किया। हमारा संविधान एक दस्तावेज है जो स्व-शासन, गरिमा और स्वतंत्रता का एक घरेलू उत्पाद है।
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संविधान की क्षमता वास्तव में सूचनात्मक: सीजेआई
सीजेआई ने कहा कि एक सरकारी दस्तावेज के रूप में, संविधान की क्षमता वास्तव में सूचनात्मक है। CJI ने कहा हमारे संविधान की सफलता को आम तौर पर स्पेक्ट्रम के दो विपरीत छोरों से देखा जाता है। कुछ लोग हमारे संविधान के बारे में पूरी तरह से प्रशंसात्मक शब्दों में बात करते हैं, जबकि अन्य लोग हमारे संविधान की सफलता के प्रति उदासीन हैं।  

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