छत्तीसगढ़ में इन दिनों नेता, अफसर और लोग शराब की दुकान खुलवाने में उलझे हैं। वर्षों से चली आ रही ठेकेदारी प्रथा को समाप्त कर सरकार ने पहली अप्रैल से शराब बेचने का फैसला किया है, इसलिए कलेक्टर से लेकर निचले स्तर के अधिकारी दुकान बनवाने व खुलवाने में लगे हैं। लोग इसके विरोध में सड़कों पर आ रहे है। कांग्रेस, जोगी कांग्रेस व अन्य पार्टी सरकार को इस मुद्दे पर घेरने में लगी है।
8 मार्च को शराब के मुद्दे पर जोगी कांग्रेस रायपुर में प्रदर्शन करेगी। सरकार के फैसले के खिलाफ भाजपा संगठन व मंत्रिमंडल में भी विरोध है। वहीं 31 मार्च तक पुराना स्टॉक खपाने के लिए ठेकेदारों ने बैनर-पोस्टर लगाकर सस्ते में शराब बेचना शुरू कर दिया है। राज्य में हर साल शराब दुकान ठेके पर दिए जाते रहे हैं, लेकिन इस साल जनवरी में भाजपा की डॉ. रमन सिंह सरकार ने ठेकेदारी प्रथा खत्म करते हुए शराब बेचने का निर्णय किया है।
सरकार का तर्क है कि कोचियाबंदी और गांव-गांव में अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए यह फैसला किया गया है। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार में शराबबंदी के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ कर चुके हैं और उनके गृह राज्य गुजरात में भी पूर्ण शराबबंदी है, ऐसे में भाजपा शासित राज्य छत्तीसगढ़ में सरकार द्वारा शराब बेचने के फैसले से यहां की राजनीति गरमा गई है।
कांग्रेस, जोगी कांग्रेस, महिला और सामाजिक संगठनों ने सरकार के फैसले के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया है। इस पर सदन में भी सरकार का विरोध हो चुका है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जोगी कांग्रेस विधानसभा का घेराव करने जा रही है।