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नक्सलियों ने बनाया इस घातक 'हथियार' का देसी मॉडल: सुरक्षा बलों के कैंपों पर एक ही रात में दाग रहे 200 बीजीएल

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 05 May 2022 05:50 PM IST

सार

सीआरपीएफ के एक बड़े अधिकारी के मुताबिक, फायरिंग के दौरान देसी 'बीजीएल' कई बार मिस हो जाता है। सुरक्षा बलों ने घटना स्थल से जो बीजीएल बरामद किए हैं, उससे यह मालूम हुआ है कि इनका निर्माण स्थानीय स्तर पर कहीं हो रहा है। इसके निर्माण में लोहे की पतली चद्दर का इस्तेमाल होता है...
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छत्तीसगढ़ में मुठभेड़ स्थल से बरामद हथियार - फोटो : Agency

 

नक्सलियों ने बस्तर सहित कई इलाकों में बीजीएल का प्रयोग किया है। केंद्रीय बलों के अलावा पुलिस कैंप पर भी इसी हथियार से निशाना साधा गया है। सुकमा के किस्टाराम क्षेत्र में स्थित पोटकपल्ली कैम्प पर नक्सलियों ने करीब डेढ़ दर्जन बीजीएल दागे थे। बीजापुर में धर्माराम कैंप पर भी बीजीएल से हमला किया गया था। नक्सलियों का प्रयास रहता है कि वे बीजीएल के जरिए सुरक्षा बलों के हथियार घऱ को निशाना बनाएं। हालांकि नक्सलियों द्वारा इस हथियार का इस्तेमाल करना, नई बात नहीं है। नक्सली, लगभग एक दशक से इसका प्रयोग कर रहे हैं। इससे पहले नक्सली किसी कैंप पर जब हमला करते थे तो पांच दस की संख्या में बीजीएल से फायर करते थे। वजह, उनके पास तब असली बीजीएल रहता था। वह बीजीएल सुरक्षा बलों या पुलिस से छीना हुआ होता था। अब उन्होंने खुद ही इसका निर्माण करना शुरू कर दिया है।

200 मीटर तक मार

सीआरपीएफ अधिकारी के अनुसार, देसी बीजीएल के चलते ही आज नक्सलियों के पास इतनी क्षमता हो गई है कि वे एक ही रात में दो सौ बीजीएल फायर करने से नहीं चूकते। ये अलग बात है कि बीजीएल का फायर कई बार मिस होता रहता है। उसमें किस तरह के ग्रेनेड का इस्तेमाल होता है, यह भी पता लगा लिया गया है। इस बीजीएल के माध्यम से नक्सली दो सौ मीटर दूरी तक का टारगेट हिट कर सकते हैं। रात के समय बीजीएल से फायर करने के बाद नक्सली बच निकलते हैं। दरअसल, सीआरपीएफ, कोबरा, डीआरजी व दूसरे सुरक्षा बलों ने मिलकर नक्सल प्रभावित क्षेत्र को कम कर दिया है। दिन प्रतिदिन नक्सलियों पर शिकंजा कसता जा रहा है। नए कैंप स्थापित किए जा रहे हैं। पिछले छह माह में नक्सल प्रभावित इलाके छत्तीसगढ़ में आठ कैंप बनाए गए हैं। ओडिशा में चार, महाराष्ट्र में एक, बिहार में एक, तेलंगाना में दो और झारखंड में चार कैंप स्थापित किए गए हैं। इससे नक्सली बौखला उठे हैं। उनका प्रयास है कि सुरक्षा बलों पर हमलों की संख्या बढ़ा दी जाए। दूसरी तरफ सुरक्षा बल अब नक्सलियों के संपूर्ण खात्मे की तरफ चल पड़े हैं।

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