छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार एक साल पहले ही चुनावी मोड में आ गई है। प्रदेश में स्थानीय और पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार ने नई पहल की है। प्रदेश में इस साल से छत्तीसगढ़िया ओलंपिक खेल का आयोजन किया जाएगा। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में हुई मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। इसमें फैसला लिया गया कि छत्तीसगढ़िया ओलंपिक में जहां ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कबड्डी, खो-खो से लेकर टेनिस बाल क्रिकेट जैसे खेल प्रतियोगिताएं होंगी, तो वहीं इस ओलंपिक में बच्चों से लेकर सौ साल के बुजुर्ग भी बतौर प्रतिभागी हिस्सा ले सकेंगे। खास बात यह कि छत्तीसगढ़िया ओलंपिक खेल में शामिल होने के लिए खिलाड़ी को छत्तीसगढ़ का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है।
प्रदेश सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों एवं 146 ब्लॉक स्तर पर होने वाले खेल आयोजन के लिए अलग-अलग समितियां गठित की जाएंगी। ग्राम पंचायत स्तर पर गठित समितियों के संयोजक सरपंच होंगे और ब्लॉक स्तर पर गठित समितियों के संयोजक विकासखंड अधिकारी होंगे। खेलों में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों के भोजन, आवागमन एवं अन्य सुविधाओं के लिए ग्राम पंचायतों और विकासखंडों के लिए बजट उपलब्ध कराया जाएगा।
भूपेश बघेल ने बतौर मुख्यमंत्री शपथ लेने के बाद छत्तीसगढ़िया संस्कृति और ग्रामीण परंपरा को आगे बढ़ाने की विशेष पहल की है। मुख्यमंत्री बघेल खुद भी अनेक मौकों पर पारंपरिक खेलों में हाथ आजमाते नजर आते हैं। मुख्यमंत्री का पारंपरिक खेलों से लगाव इस तरह से भी देखने को मिला है कि भेंट मुलाकात समेत उनके कार्यक्रम के दौरान वे बच्चों के बीच पहुंचकर भौंरा, कंचे, गुल्ली-डंडा, पिट्ठुल खेलने लगते हैं।
इसके अलावा कैबिनेट में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अनुसूचित जाति वर्ग के हित में तत्परता से कार्यवाही एवं उनसे संबंधित नीति विषयक मामलों में अनुशंसा के लिए अनुसूचित जाति सलाहकार परिषद के गठन का निर्णय लिया है। इस परिषद के गठन का उद्देश्य छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति वर्ग की बेहतरी और उनके जीवन स्तर में तेजी से सकारात्मक बदलाव लाना है तथा उन्हें शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है।