पांच राज्यों में हुए मतदान की मतगणना जारी है। शुरुआती रुझान किसी पार्टी के लिए खुशी तो किसी के लिए दुख की खबर लेकर आ रहे हैं। छत्तीसगढ़ में 15 सालों से भाजपा की सरकार है उसे हटाने के लिए कांग्रेस, अजीत जोगी और मायावती ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। इसका कांग्रेस को फायदा होता हुआ भी दिख रहा है क्योंकि रुझानों में पार्टी को पूर्ण बहुमत मिल गया है। यदि यह रुझान सच साबित होते हैं तो पार्टी राज्य में 15 साल के भाजपा के वर्चस्व को तोड़ने में कामयाब हो जाएगी।
कुछ लोगों का मानना है कि कांग्रेस को मिल रही इस अप्रत्याशित जीते के पीछे उसका उत्तर प्रदेश के फूलपुर-कैराना और गोरखपुर में हुए लोकसभा उपचुनावों में अपनाया गया फार्मूला है। इसी साल यूपी में उपचुनाव हुए थे। जिसमें समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था लेकिन कांग्रेस ने यहां अकेले चुनाव लड़ा था। इसी फॉर्मूले को अपनाते हुए कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में किसी के साथ गठबंधन नहीं किया और अकेले चुनाव मैदान में उतरी। जिसका उसे फायदा होता हुआ भी दिखाई दे रहा है।
बता दें कि छत्तीसगढ़ में अजित जोगी की छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस और मायावती की बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन ने मिलकर चुनाव लड़ा था। काफी समय तक इस गठबंधन ने कांग्रेस से आस लगाई लेकिन जब उनकी उम्मीद और मांगे पूरी नहीं हुई तो उन्होंने साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया। अगर कांग्रेस चाहती तो इस गठबंधन का समर्थन कर सकती थी लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसका सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा को हुआ क्योंकि उसके वोट तीन हिस्सों में बंट गए।