भारतीय जनता पार्टी ने अपनी दो सबसे महत्वपूर्ण कमेटियों में यूं ही बड़े बड़े फेरबदल नहीं कर दिए। भाजपा के दो कद्दावर नेताओं को इस कमेटियों से बाहर कर देना और फिर कुछ नए और कुछ अनुभवी चेहरों को वरीयता देखकर इन कमेटियों में समायोजित करना भविष्य की राजनीति के लिहाज से बहुत कुछ कहता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी की इन दो समितियों ने आने वाले चुनावों के लिहाज से उत्तर से लेकर दक्षिण और पश्चिम से लेकर नॉर्थईस्ट तक सब को साधने की न सिर्फ कोशिश की है बल्कि आगामी चुनावों में जीतने के लिए एक नया रोडमैप तैयार कर दिया है।
पार्टी की सबसे मजबूत और ताकतवर मानी जाने वाली संसदीय बोर्ड से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को बाहर कर दिया गया है। नए संसदीय बोर्ड में इन दोनों नेताओं का बाहर होना चौंकाता भी है। हालांकि भारतीय जनता पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने लंबे समय से अपना योगदान देने वाले वरिष्ठ और अनुभवी लोगों को महत्वपूर्ण समितियों में जगह दी गई है। फिलहाल भाजपा के संसदीय बोर्ड में जो नाम जुड़े हैं उसमें कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा के साथ-साथ बीएल संतोष और असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनेवाल समेत भारतीय जनता पार्टी के ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लक्ष्मण समेत सिख नेता इकबाल सिंह लालपुरा का नाम शामिल है। जानकारों का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी ने दक्षिण को मजबूत करने के लिए लिहाज से कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा, के लक्ष्मण और बीएल संतोष को आगे किया है। वरिष्ठ राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिस तरीके से बीएस येदुरप्पा से इस्तीफा लिया गया था उससे लोकसभा के चुनावों के साथ-साथ विधानसभा में होने वाले चुनावों में नुकसान की पूरी भरपाई येदयुरप्पा को पार्टी की सबसे महत्वपूर्ण कमेटी में शामिल करने के साथ हो जाएगी।
इसके अलावा संसदीय बोर्ड में के लक्ष्मण के नाम के साथ आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में अपनी मजबूत स्थिति को दर्ज कराने की कोशिश की है। संगठन के महत्वपूर्ण सदस्य बीएल सतोष का नाम भी दक्षिण भारत में भारतीय जनता पार्टी की स्थिति को मजबूत करेगा। वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक डीएस तोमर कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी ने वास्तव में इस संसदीय बोर्ड में उत्तर दक्षिण पश्चिम और नॉर्थईस्ट को साधा है। वो कहते हैं कि संसदीय बोर्ड में सुधा यादव का नाम बहुत महत्वपूर्ण है। तोमर कहते हैं कि सुधा यादव के पति बीएसएफ में थे और कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हो गए थे। सुधा यादव को संसदीय बोर्ड में शामिल करने के साथ भारतीय जनता पार्टी ने स्पष्ट तौर पर संदेश देने की कोशिश की है कि उनकी पार्टी सेना और अर्धसैनिक बलों का न सिर्फ सम्मान करती है बल्कि पार्टी में महत्वपूर्ण जगह भी देती है। पंजाब के सिख नेता और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ सदस्य इकबाल सिंह लालपुरा को पार्टी ने संसदीय बोर्ड बोर्ड में शामिल कर आने वाले लोकसभा के चुनावों में सिखों की नाराजगी को दूर करने का एक बड़ा प्रयास किया है। तोमर कहते हैं कि किसानों के लगातार चले आंदोलन की वजह से जो नुकसान हुआ है उससे इसकी भरपाई की कोशिश की गई है।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता कहते हैं कि पार्टी ने जो नए संसदीय बोर्ड का गठन किया है वह बताता है कि पार्टी ने अपने अनुभवी और पुराने कार्यकर्ताओं को सम्मान दिया है। उनका कहना है कि पार्टी अपने इन पुराने नेताओं के अनुभवों से एक नया मुकाम हासिल करेगी। वह कहते हैं कि बीएस येदुरप्पा, सत्यनारायण जटिया और के लक्ष्मण जैसे नेताओं ने पार्टी में अपना बहुत योगदान दिया है। यही वजह है कि पार्टी उनको अपनी सबसे महत्वपूर्ण कमेटी में शामिल करके यह संदेश दे रही है कि पार्टी किसी भी कार्यकर्ता और पुराने से पुराने नेता को भूलती भी नहीं है और उनको बाकयदा महत्वपूर्ण कमेटियों में शामिल कर सम्मान भी करती है। राजनीतिक विश्लेषक ओपी मिश्रा का कहना है कि अगर आप बोर्ड के सदस्यों की लिस्ट देखें तो आपको नार्थ ईस्ट में सर्वानंद सोनेवाल और दक्षिण में लक्ष्मण बीएस येदुरप्पा का नाम दिखेगा। जबकि सिख कम्युनिटी से इकबाल सिंह लालपुरा का नाम दिखेगा। वो कहते हैं कि नॉर्थ ईस्ट में सर्वानंद सोनेवाल के नाम के साथ पार्टी ने युवाओं से लेकर हर वर्ग में अपने जुड़ाव का संदेश दिया है।
भारतीय जनता पार्टी की सबसे महत्वपूर्ण संसदीय कमेटी के बाद चुनाव समिति में शामिल किए गए नाम भी बहुत संदेश देने वाले हैं। हाल में ही महाराष्ट्र के बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में जिस तरीके से पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को उपमुख्यमंत्री का पद दिया गया था उससे चर्चाएं हो रही थी कि फडणवीस का पार्टी में कद घट गया है। वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु शितोले कहते हैं कि लेकिन पार्टी ने एक झटके में ही चुनाव समिति में उनको शामिल कर इस पूरी धारणा को बदल दिया। शितोले के मुताबिक, देवेंद्र फडणवीस के लिए तो यह बहुत बड़ी जिम्मेदारी है ही बल्कि उनके विरोधियों के लिए यह एक संदेश भी है कि पार्टी किस तरीके से बड़े नेताओं में सामंजस्य बिठाकर अपने युवा नेताओं को आगे बढ़ाती है। हालांकि शितोले कहते हैं की पार्टी ने फडणवीस का नाम किसी संदेश देने के लिए इस कमेटी में शामिल नहीं किया है बल्कि एक युवा नेता के तौर पर जिस तरीके से उनको पहले प्रमोट किया जा रहा था ठीक उसी तरीके से आगे बढ़ाया है। चुनाव समिति में देवेंद्र फडणवीस के बाद एक महत्वपूर्ण नाम भूपेंद्र यादव का भी जुड़ा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है पार्टी नए चेहरों को बड़ी जिम्मेदारी वाली कमेटियों में शामिल कर एक नई दिशा में आगे बढ़ रही है। चुनाव समिति में संसदीय बोर्ड के सभी सदस्यों के साथ ओम माथुर को भी जगह मिली है। चूंकि ओम माथुर राजस्थान से ताल्लुक रखते हैं और वहां पर आने वाले दिनों में विधानसभा चुनाव है। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि ओम माथुर को इस समिति में शामिल कर उनको न सिर्फ एक बड़ी जिम्मेदारी दी गई है बल्कि राजस्थान के लिहाज से चुनावी रोडमैप तैयार किया गया है।
हालांकि भारतीय जनता पार्टी की इन दो महत्वपूर्ण समितियों में कुछ और बड़े नाम के शामिल होने की चर्चाएं थीं, लेकिन उनको फिलहाल इस में जगह नहीं दी गई है खासतौर से संसदीय बोर्ड में कुछ कद्दावर नेताओं का नाम चल रहा था। हालांकि चुनाव समिति में अभी चार सदस्यों के नाम जुड़ने की संभावनाएं बनी हुई हैं। अनुमान है कि आने वाले कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव समिति में बचे हुए सदस्य का भी चयन कर लिया जाएगा।