गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने वडोदरा शहर के पास एक निर्माणाधीन फैक्ट्री में छापेमारी के दौरान 1,125 करोड़ रुपये मूल्य के 225 किलोग्राम पार्टी ड्रग मेफेड्रोन की जब्ती के सिलसिले में छह लोगों को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। एटीएस के पुलिस अधीक्षक सुनील जोशी ने कहा कि शुरुआती जांच में पता चला है कि जब्त मेफेड्रोन का निर्माण राज्य के भरूच जिले के सैखा गांव में एक रासायनिक कारखाने में किया गया था, जिसे वडोदरा जिले के सावली तालुका में इस निर्माणाधीन केंद्र में प्रोसेस किया गया था।
एटीएस ने 225 किलोग्राम मेफेड्रोन जब्त की
उन्होंने कहा कि एक विशेष गुप्त सूचना के आधार पर गुजरात एटीएस की एक टीम ने मंगलवार सुबह इस कारखाने-गोदाम में छापा मारा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में 1,125 करोड़ रुपये मूल्य का 225 किलोग्राम मेफेड्रोन जब्त किया। इस निर्माणाधीन फैक्ट्री का मालिक सूरत निवासी महेश वैष्णव है, जो इस रैकेट का मास्टरमाइंड है और उसका पार्टनर वडोदरा का रहने वाला पीयूष पटेल है। इस साल की शुरुआत में वैष्णव ने मेफेड्रोन बनाने की योजना बनाई और सायखा में स्थित रासायनिक कारखाने के दूसरे मालिकों से संपर्क किया।
भरूच वाले फैक्ट्री के मालिक राकेश मकानी, विजय वसोया और दिलीप वाघासिया हैं। यह दूसरी कंपनियों के लिए अनुबंध के आधार पर रासायनिक पदार्थों और अन्य दवा उत्पादों के निर्माण के लिए स्थापित किया गया था। रसायन विज्ञान विषय में एमएससी मकानी 2011 से फार्मा व्यवसाय में हैं। मकानी, वैष्णव के प्रस्ताव पर सहमत हुए और इस साल जनवरी में मेफेड्रोन का निर्माण शुरू किया। अवैध ड्रग्स बनाने के लिए कच्चे माल की आपूर्ति वैष्णव ने की थी।
महेश वैष्णव है मास्टरमाइंड
वैष्णव भरूच से सावली में अपनी फैक्टरी में लिक्विड मेफेड्रोन लाया और सूखने के बाद इसे पाउडर के रूप में बदल दिया। उसने कबूल किया कि उसने मुंबई के किसी दिनेश ध्रुव और दो अन्य लोगों को लगभग 15 किलो मेफेड्रोन और राजस्थान के एक व्यक्ति को 15 किलो की आपूर्ति की थी। बाकी को एटीएस ने जब्त कर लिया है। एटीएस अब तक वैष्णव, पटेल, मकानी, वसोया, वघांसिया और ध्रुव को हिरासत में ले चुकी है। जांच में पता चला है कि ध्रुव ने ही मास्टरमाइंड वैष्णव और फैक्ट्री मालिक राकेश मकानी की मीटिंग कराई थी।
1994 में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम मामले में गिरफ्तारी के बाद ध्रुव ने 12 साल सलाखों के पीछे बिताए थे। इसी तरह वैष्णव ने 1998 में भावनगर में एक ड्रग तस्करी मामले में गिरफ्तारी के बाद सात साल जेल में बिताए थे। जोशी ने कहा कि नशीली दवाओं के व्यापार में शामिल अन्य लोगों को पकड़ने के लिए जांच जारी है।