चिकित्सा उपकरण की खराबी की वजह से यदि अब मरीज की गलत रिपोर्ट आई तो कंपनी निर्माताओं की खैर नहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार जल्द ही देश भर में चिकित्सीय उपकरणों को लेकर नये नियम लागू करने जा रही है।
इसके तहत मरीज की गलत जांच करने वाले उपकरण पर निर्माता कंपनी को जवाब देना होगा। सरकार ने फैसला लिया है कि राज्यों के स्तर पर बाजार में मौजूद इनविट्रो डायग्नोस्टिक मेडिकल डिवाइस (आईवीडीएमडी) की निगरानी की जाएगी। इसे पोस्ट मार्केट सर्विलांस का नाम दिया है। जानकारी के अनुसार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने नये नियमों का खाका तैयार भी कर लिया है।
इसके तहत अगर किसी मरीज को लैब में गलत जांच रिपोर्ट मिलती है तो उपकरण के खिलाफ सरकारी तंत्र न सिर्फ संज्ञान लेगा बल्कि दोषी पाए जाने पर कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी। अभी तक ऐसी स्थिति में निर्माता कंपनियां आसानी से अपना बचाव कर लेती थीं, लेकिन अब नये नियमों को इस तरह से बनाया गया है कि अगर लैब में कोई उपकरण सही कार्य नहीं कर रहा है, तो इसकी शिकायत सीधे स्थानीय औषधि नियंत्रण विभाग को डॉक्टर या नर्स कर सकते हैं।
संक्रमित भी आ सकता है निगेटिव
इनविट्रो डायग्नोस्टिक मेडिकल डिवाइस, लैब में जांच के दौरान इस्तेमाल में आती हैं। हैपेटाइटिस, एचआईवी, कैंसर, मलेरिया, डेंगू, अन्य तरह के संक्रमण इत्यादि की जांच में इन्हीं उपकरणों की मदद लेकर स्वास्थ्यकर्मी जांच करते हैं। कई बार देखने को मिलता है कि मरीज की जांच रिपोर्ट निगेटिव होने के बाद भी वह संक्रमित होता है। या फिर संक्रमित न होने के बाद भी जांच रिपोर्ट पॉजीटिव आती है। ऐसी स्थिति में भी उपकरण निर्माता को जवाब देना पड़ सकता है।
स्वास्थ्य सेवाओं में दिखेगा बदलाव
सीडीएससीओ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, इनविट्रो डिवाइस सीधे तौर पर मरीज के संपर्क में नहीं आती है। हालांकि ग्लूकोमीटर जैसे भी कुछ उपकरण हैं जो सीधे संपर्क में आते हैं, लेकिन फिलहाल नये नियम लैब में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों पर है।
जल्द ही इन नियमों को देश भर में लागू किया जाएगा। साथ ही जिला औषधि नियंत्रक अधिकारी को पूरा अधिकार होगा कि इस मामले में वे स्वतंत्र रूप से फैसला ले सके। जिन उपकरणों को राष्ट्रीय स्तर पर सीडीएससीओ से मान्यता प्राप्त है वे सभी इसके दायरे में आएंगे। उन्होंने बताया, नये नियम आने का सबसे बड़ा फायदा स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता पर पड़ेगा। मरीज को सही जांच उपलब्ध होगी तो उसका उपचार भी सही तरीके से संभव है।