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Chandrayaan 3: इसरो में विश्वास,आस्था और तनाव के बीच उत्साह का माहौल, वैज्ञानिक लैंडर को भेज रहे इनपुट

राहुल संपाल
Updated Wed, 23 Aug 2023 03:16 PM IST

सार

इसरो में चंद्रयान-3 से जुड़े स्पेस और ग्राउंड सिस्टम की लगातार जांच की जा रही है।  इसरो के टेलीमेट्री एंड कमांड सेंटर के मिशन ऑपरेशन कॉम्प्लेक्स में 50 से ज्यादा विज्ञानी कंप्यूटर पर चंद्रयान 3 से तीन मिल रहे आंकड़ों के पड़ताल में जुटे है। 
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Chandrayaan 3 - फोटो : Social Media


चंद्रयान की हर पल की जानकारी लेने के लिए कंट्रोल रूम में विशाल स्क्रीन लगाई गई है। इसमें छह हिस्सों में लैडर की डिसेंट ट्रेजेक्टरी को ग्राफिक्स, पैरामीटर्स डेटा और एनिमेशन के रूप में देखा जा सकेगा। एनीमेशन के लैंडर व रोवर की हर गतिविधियों को वैसा ही देखा जा सकेगा जैसे लाइव टेली रिले चल रहा है।


इसरो में चंद्रयान-3 से जुड़े स्पेस और ग्राउंड सिस्टम की लगातार जांच की जा रही है। लैंडिंग के एक दिन पहले यानी मंगलवार से ही इसरो के टेलीमेट्री एंड कमांड सेंटर के मिशन ऑपरेशन कॉम्प्लेक्स में 50 से ज्यादा विज्ञानी कंप्यूटर पर चंद्रयान 3 से तीन मिल रहे आंकड़ों के पड़ताल में जुटे है।


सेंटर के तमाम वैज्ञानिक सांकेतिक भाषा में बात कर रहे है। वैज्ञानिकों की टीम लैंडर को लगातार इनपुट भेज रही है ताकि लैंडिंग के समय गलत फैसला लेने की हर गुजाइंश को खत्म कर दे। इसरो स्थित टेलीमेट्री एंड कमांड सेंटर मिशन में विश्वास,आस्था, तनाव,उत्साह  के बीच गर्व का माहौल है।


इस बीच चंद्रयान-3 की लैंडिंग से पहले इसरो ने कमांड सेंटर की तस्वीर शेयर की है। इसरो ने ट्वीट किया, "स्वचालित लैंडिंग अनुक्रम (एएलएस) शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। लगभग 17:44 बजे निर्धारित बिंदु पर लैंडर मॉड्यूल (एलएम) के पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है। एएलएस कमांड प्राप्त होने पर, एलएम संचालित वंश के लिए थ्रॉटलेबल इंजन को सक्रिय करता है। मिशन संचालन टीम आदेशों के क्रमिक निष्पादन की पुष्टि करती रहेगी। एमओएक्स में संचालन का सीधा प्रसारण 17:20 बजे शुरू होगा।


दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग कठिन

चंद्रयान-3 मिशन पर अंतरिक्ष रणनीतिकार पी.के. घोष ने चंद्रयान-3 लैंडिंग को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि मुझे लगता है कि यह भारत के लिए बहुत बड़ा दिन है। कारण यह है कि चंद्रयान 2 लैंडिंग नहीं कर सका था और अब हम पूरी दुनिया को दिखाना चाहते हैं कि हमारे पास न केवल तकनीकी क्षमता है बल्कि हमारे पास दक्षिणी ध्रुव पर जाकर सॉफ्ट लैंडिंग करने की भी क्षमता है।


दक्षिणी ध्रुव एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ अब तक कोई लैंडिंग नहीं हुई है। पहले की सभी लैंडिंग भूमध्य रेखा के अंदर और उसके आसपास हुई हैं। दक्षिणी ध्रुव पर उतरना कठिन है और इसलिए इतने कम बजट में ऐसा करना भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह एक बड़ा दिन है।
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