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Chandrayaan-3: इन 19 सेंटर्स से चंद्रयान पर रखी जा रही है नजर, हर सेकंड का ऐसे रखा जा रहा है हिसाब-किताब

आशीष तिवारी
Updated Mon, 21 Aug 2023 05:49 PM IST

सार

वैज्ञानिकों के मुताबिक अगले 48 से 50 घंटे मिशन चंद्रयान के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। नासा और इसरो के साथ काम कर चुके वरिष्ठ वैज्ञानिक संजीव सहजपाल कहते हैं कि जैसे-जैसे चंद्रयान चंद्रमा की सतह के नजदीक पहुंचता जाएगा, समूची दुनिया इस ऐतिहासिक घटनाक्रम पर करीब से नजर बनाती जाएगी।
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चंद्रयान-3 - फोटो : अमर उजाला


इस तरह से हो रही है मजबूत तैयारियां...

वैज्ञानिकों के मुताबिक अगले 48 से 50 घंटे मिशन चंद्रयान के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। नासा और इसरो के साथ काम कर चुके वरिष्ठ वैज्ञानिक संजीव सहजपाल कहते हैं कि जैसे-जैसे चंद्रयान चंद्रमा की सतह के नजदीक पहुंचता जाएगा समूची दुनिया इस ऐतिहासिक घटनाक्रम पर करीब से नजर बनाती जाएगी। वह कहते हैं कि इसरो के देश और दुनिया भर के अलग लगा हिस्सों के स्थापित "टेलिमेटरी ट्रैकिंग एंड कमांड सेंटर" के माध्यम से चंद्रयान के लैंडर की मॉनिटरिंग की जाएगी। वो कहते हैं कि इन अलग-अलग सेंटर से हर एंगल पर न सिर्फ लैंडर को मॉनिटर किया जाएगा बल्कि एक एक सेकंड के सौंवे हिस्से से भी कम में भी उसके पूरे मूवमेंट पर नजर रखी जाएगी। वह कहते हैं वैसे तो यह सभी सेंटर लगातार चंद्रयान की लॉन्चिंग के समय से ही इसको पूरी तरह से मॉनिटर कर रहे हैं, लेकिन जब मिशन के चंद्रमा की सतह पर लैंड करने का वक्त आता है तो इन देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में फैले कमांड सेंटर्स की महत्वपूर्ण भूमिका भी होने लगती है।




स्पेस सेंटर से भी लगातार मिलती रहती है मदद...

वरिष्ठ वैज्ञानिकों का कहना है कि मिशन चंद्रयान की सफलतापूर्वक लॉन्चिंग भारत के लिए तो बहुत बड़ी उपलब्धि होगी ही, लेकिन दुनिया के लिए भी यह उपलब्धि उतनी ही महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि चंद्रमा के रहस्य और भविष्य के लिहाज से की जाने वाली वैज्ञानिक खोज में समूची दुनिया को इसका लाभ भी मिलेगा। इसरो से जुड़े रहे वरिष्ठ वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी भी तरीके के अंतरिक्ष मिशन में टेलिमेटरी ट्रैकिंग सेंटर्स की मदद तो ली ही जाती है बल्कि इसके साथ स्पेस सेंटर के माध्यम से भी पल-पल की सूचनाओं और अपने मिशन के बारे में हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है। मिशन चंद्रयान में भी इसी तरह से स्पेस सेंटर के माध्यम से पूरी जानकारियां और लैंडिंग उसकी दिशाओं की भी पूरी ऑब्जरवेशन की जा रही है। इसरो के इस मिशन में शामिल वैज्ञानिकों की पूरी टीम टेलिमेटरी ट्रैकिंग सेंटर्स और स्पेस सेंटर्स से भी लगातार संपर्क में है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मिशन चंद्रयान सफलतापूर्वक चंद्रमा की सतह पर उतर जाता है तो भारत के लिए बड़ी एक बहुत बड़ी उपलब्धि तो होगी ही, लेकिन दुनिया के लिए भी यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जाएगा।


चांद के गुरूत्वाकर्षण का न पड़े असर...

इसरो और नासा से जुड़े रहे वैज्ञानिक संजीव सहजपाल कहते हैं कि लैंडर अब चांद की सतह से बहुत कम किलोमीटर की दूरी पर ही रह गया है। यह सबसे महत्वपूर्ण वक्त माना जाता है। उनका कहना है कि चांद के गुरुत्वाकर्षण का लैंडर के ऊपर कोई असर ना पड़े इसका सबसे खास ध्यान वैज्ञानिक रखते हैं। वैज्ञानिकों का कहना हैं कि लैंडर की स्पीड इस वजह से भी कम कर दी जाती है कि कहीं वह चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में आकर अपना संतुलन न खो बैठे। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि धरती की तुलना में चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण तकरीबन छह गुना कम है, बावजूद इसके चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण के लिहाज से पूरी तैयारियां लैंडिंग की की जाती है। 




चंद्रयान 3 मिशन का लैंडर मॉड्यूल चांद की सतह से महज 25 से 150 किलोमीटर की दूरी पर चक्कर लगा रहा है। इसरो के मुताबिक, चंद्रयान-3 का दूसरा और अंतिम डीबूस्टिंग मनूवर सफलतापूर्वक हो चुका है और अब 23 अगस्त का इंतजार है, जब चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के साथ ही भारत इतिहास रच देगा और ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। अभी तक अमेरिका, रूस और चीन ने ही चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने में सफलता हासिल की है। इतना ही नहीं चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग कराने वाला भारत पहला देश हो सकता है।
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