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चांद से 35 किलोमीटर दूर लैंडर विक्रम, सौ फीसदी सफलता की ओर चंद्रयान-2

Fri, 06 Sep 2019 11:41 AM IST
Nilesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • देश का दूसरा महत्वाकांक्षी चंद्र मिशन चंद्रयान-2 चांद के बेहद पास पहुंच गया है
  • चंद्रयान-2 ऑर्बिटर चंद्रमा की मौजूदा कक्षा में लगातार चक्कर काट रहा है
  • इसरो के अध्यक्ष ने कहा कि चांद पर लैंडर के उतरने का क्षण ‘खौफनाक’ होगा
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मिशन कंट्रोल रूम (इसरो) - फोटो : ANI
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विस्तार
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चंद्रमा की सतह पर ऐतिहासिक सॉफ्ट लैंडिंग के और करीब पहुंचते हुए चंद्रयान दो अंतरिक्ष यान को निचली कक्षा में उतारने का दूसरा चरण बुधवार को तड़के सफलतापूर्वक पूरा हो गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक बयान में कहा कि इस प्रक्रिया के साथ ही यान उस कक्षा में पहुंच गया, जो लैंडर विक्रम को चंद्रमा की सतह की ओर नीचे ले जाने के लिए आवश्यक है।

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इसरो ने बताया कि चंद्रयान को निचली कक्षा में ले जाने का कार्य बुधवार तड़के करीब पौने चार बजे किया गया। इस प्रक्रिया में नौ सेकंड का समय लगा। इसके लिए प्रणोदन प्रणाली का प्रयोग किया गया।
 


इससे पहले यान को चंद्रमा की निचली कक्षा में उतारने का पहला चरण मंगलवार को पूरा किया गया था। यह प्रक्रिया चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से लैंडर विक्रम के अलग होने के एक दिन बाद संपन्न की गई।

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सोमवार को लैंडर विक्रम ऑर्बिटर से सफलतापूर्वक अलग हुआ था। अगर सब कुछ ठीक रहा तो विक्रम और उसके भीतर मौजूद रोवर ‘प्रज्ञान’ के शनिवार देर रात 1 बजकर 30 मिनट से 2 बजकर 30 मिनट के बीच चांद की सतह पर उतरने की उम्मीद है।

चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग के बाद रोवर उसी दिन सुबह 3 बजकर 30 मिनट से 6 बजकर 30 मिनट के बीच निकलेगा और चांद की सतह पर रहकर परीक्षण करेगा।     

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14 दिन परीक्षण करेगा ‘प्रज्ञान’

इसरो के मुताबिक, प्रज्ञान एक चंद्र दिवस यानी पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर चांद की सतह का परीक्षण करेगा। लैंडर का मिशन एक चंद्र दिवस होगा, जबकि ऑर्बिटर एक साल तक काम करेगा। इसरो के अध्यक्ष के. सिवन ने कहा कि चांद पर लैंडर के उतरने का क्षण ‘खौफनाक’ होगा क्योंकि एजेंसी ने पहले ऐसा कभी नहीं किया है जबकि चंद्रयान-1 मिशन में यान को निचली कक्षा में ले जाने का काम पहले भी सफलतापूर्वक किया गया था। 

भारत बनेगा चौथा देश 

चांद पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग के साथ ही भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। इससे पहले केवल चीन, अमेरिका और रूस ही ऐसा कर सके हैं। भारत ने 22 जुलाई को 3,840 किलोग्राम वजनी चंद्रयान-2 को जीएसएलवी मैक-3 रॉकेट से प्रक्षेपित किया था। इस योजना पर कुल 978 करोड़ रुपये की लागत आई है। 
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