हिन्दू विवाह अधिनियम और विशेष विवाह अधिनियम में दाम्पत्य जीवन को पुन:बहाल करने के प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका पर अब तीन सदस्यीय पीठ सुनवाई करेगी। मंगलवार को दो सदस्यीय पीठ ने इस मामले को बड़ी पीठ केपास रेफर कर लिया। याचिका में कहा गया है कि दाम्पत्य जीवन को पुन:बहाल करने का प्रावधान मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
किसी को किसी के साथ रहने के लिए बाध्यान नहीं किया जा सकता है। चीफ जस्टिस रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने इस याचिका पर परीक्षण करने का निर्णय लेते हुए इस मामले को तीन सदस्यीय पीठ केपास भेज दिया है। साथ ही इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
याचिका में कहा गया है निजता के अधिकार और अडल्ट्री कानून को खत्त्म करने और दो बालिगों द्वारा सहमति से बनाए गए यौन संबंध ताक अपराध केदायरे से बाहर करने के फैसलों केबाद यह प्रावधान बिल्कुल सही नहीं है कि किसी को किसी को साथ रहने के लिए बाध्य किया जाए। याचिका दो विधि छात्रों की ओर से दायर की गई है। याचिका में हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा-9 और विशेष विवाह अधिनियम की धारा-22 को चुनौती दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार
स्वतंत्रा सेनानियों के लिए मेमोरियल बनाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता को संबंधित अथॉरिटी केपास जाने के लिए कहा है। चीफ जस्टिस रंजन गोगई और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से कहा कि आपकी याचिका सही हो सकती है लेकिन फोरम सही नहीं है। पीठ ने याचिकाकर्ता को संबंधित अथॉरिटी के पास जाने के लिए कहा है।