सहकारिता मंत्रालय ‘सहकार से समृद्धि' के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए नई राष्ट्रीय सहकारी नीति तैयार कर रही है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जुलाई 2021 को एक नए सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की गई थी, जिसका उद्देश्य सहकारी क्षेत्र के विकास के लिए 'सहकार से समृद्धि' के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए नए सिरे से प्रोत्साहन प्रदान करना था। इसी कड़ी में दुनिया के बाजारों में देश निर्मित उत्पादों का निर्यात करने के लिए एक बहुराज्यीय निर्यात गृह बनाने पर मंत्रालय ने जोर दिया है।
उद्घाटन के दिन सम्मेलन की शुरुआत सहकारिता राज्यमंत्री बी एल वर्मा के स्वागत भाषण और केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह के उद्घाटन भाषण से हुई।सम्मेलन के पहले दिन, राज्य के सहकारिता मंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल और कई वरिष्ठ अधिकारियों ने सहकारिता से जुड़े कई क्षेत्रों पर अपने विचार रखे।
सहकारिता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया
सम्मेलन में विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया, जिनमें राष्ट्रीय सहयोग नीति, राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस, सहकारिता मंत्रालय की नई प्रस्तावित योजनाएं यानी हर पंचायत में पैक्स (PACS), कृषि आधारित और अन्य उत्पादों का निर्यात, जैविक उत्पादों का प्रचार और मार्केटिंग, नए क्षेत्रों में सहकारी समितियों का विस्तार शामिल हैं। इसके अलावा, पैक्स के मॉडल उपनियमों सहित पैक्स के कम्प्यूटरीकरण, निष्क्रिय पैक्स के पुनरोद्धार के लिए कार्य योजना, लंबी अवधि के वित्तपोषण, दुग्ध सहकारी समितियों और मछली सहकारी समितियों आदि को प्राथमिकता देने के संबंध में प्राथमिक सहकारी समितियों से संबंधित मुद्दों के साथ-साथ पैक्स के मॉडल उप-नियमों पर भी चर्चा की गई।
सहकारी वित्त पोषण में अग्रणी होने के नाते एनसीडीसी (NCDC) ने राज्यों में अपने क्षेत्रीय निदेशालयों के माध्यम से सुविधा के साथ सहकारी क्षेत्र को ऋण देने की संभावनाओं और अवसरों के बारे में जानकारी दी।
राज्यों से पैक्स के कम्प्यूटरीकरण करने का अनुरोध
ज्ञानेश कुमार, सचिव, (सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार) ने देश में सहकारी आंदोलन की शक्ति पर प्रकाश डाला और राज्यों से पैक्स के कम्प्यूटरीकरण पर परियोजना के तहत अप-टू-डेट हार्डवेयर के साथ अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर अपनाने का अनुरोध किया, जैसा कि भारत सरकार द्वारा अनुमोदित किया गया है। इसके अलावा, सहकारिता के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए, मंत्रालय एमएससीएस अधिनियम 2002 के तहत एक राष्ट्रीय स्तर के सहकारी निर्यात गृह के पंजीकरण की सुविधा प्रदान कर रहा है, जो केंद्रीय विदेश मंत्रालय और केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के साथ सहकारी आंदोलन से जुड़े लगभग 30 करोड़ लोगों की निर्यात क्षमता को नियंत्रित करने के लिए करीबी समन्वय में काम करेगा।
सहकारिता सचिव ने जैविक उत्पादों और गुणवत्ता वाले बीजों के उत्पादन, खरीद, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के लिए पंजीकृत होने वाली बहु-राज्य सहकारी समिति के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने आगे बताया कि सहकारिता मंत्रालय यह सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई कर रहा है कि सहकारी समितियों को अन्य आर्थिक रूपों के समान माना जाए। 'सहकार से समृद्धि' तक के मंत्र को साकार करने के लिए देश में सहकारी आधारित आर्थिक मॉडल को प्रोत्साहन देने के लिए सभी हितधारकों के एक साथ काम करने के संकल्प के साथ सम्मेलन का समापन हुआ।