राष्ट्रीय महिला कोष को बंद करने के पीछे सरकार ने कुछ तर्क भी दिए हैं। दरअसल अब ग्रामीण महिलाओं के लिए पर्याप्त ऋण सुविधाएं मौजूद हैं।
सरकार ने 30 साल पहले गठित राष्ट्रीय महिला कोष (आरएमके) को इस सिफारिश के बाद बंद कर दिया है कि इसकी प्रासंगिकता खत्म हो गई है। एक गजट अधिसूचना के अनुसार इसकी वजह ये है कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए पर्याप्त वैकल्पिक ऋण सुविधाएं उपलब्ध हैं। राष्ट्रीय महिला कोष को 1993 में लॉन्च किया गया था। इसकी वजह ये थी कि अनौपचारिक क्षेत्र में महिलाओं को संपार्श्विक-मुक्त ऋण (कोलेट्रल लोन) प्रदान किया जाए। इस बारे में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि प्रधान आर्थिक सलाहकार द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में राष्ट्रीय महिला कोष को बंद करने की सिफारिश की गई है। इसकी वजह ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं का विस्तार होना है। इसके अलावा कोलेट्रल लोन की आसान उपलब्धता के बाद इसकी प्रासंगिकता खो गई है।