नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कहा है कि जल शक्ति मंत्रालय द्वारा देश में भूजल निकासी को विनियमित और नियंत्रित करने के लिए जारी दिशा-निर्देश पुरानी योजना को मामूली बदलाव, परिवर्तन और संशोधन के साथ प्रदान किया गया एक नया कवर है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति एके गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि 2020 के दिशा-निर्देश मोटे तौर पर उसके द्वारा बार-बार और लगातार दिए गए निर्देशों के अनुकूल नहीं है।
एनजीटी ने कहा, हमें दिशा-निर्देश 2020 में बहुत सुधार नहीं दिखता है। यह पुरानी योजना को केवल एक नया कवर प्रदान किया गया है जिसमें मामूली बदलाव, परिवर्तन और संशोधन हैं। लेकिन भूजल का संरक्षण, रोकथाम, पुनर्भरण और बहाली जैसे अहम मुद्दों के लिए गंभीर और प्रभावी प्रयास नहीं दिखते।
दिशानिर्देश 2015 में अधिक दोहन वाले में किसी भी जल उपयोग वाले उद्योग को कोई एनओसी नहीं दी जानी थी, भले ही वह एमएसएमई हो। अब यह पैकेज्ड वाटर उद्योगों तक ही सीमित है। जाहिर है, पानी के संबंध में भारी छूट दी गई है। बिना किसी कारण और ट्रिब्यूनल के आदेश की घोर अवज्ञा करके ऐसे उद्योगों को राहत दी गई है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि गंभीर और अर्ध-गंभीर क्षेत्रों को अछूता छोड़ दिया गया है और वहां कोई प्रतिबंध नहीं है।