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Election: अधिकारियों को 'रथ प्रभारी' बनाने की सरकार की योजना कुछ राज्यों में अटकी, चुनाव आयोग ने लगाई रोक

Fri, 27 Oct 2023 08:07 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अधिकारियों के एक वर्ग और विपक्ष के एतराज के बीच चुनाव आयोग का निर्देश सामने आया है, जिसमें चुनाव आयोग ने पांच चुनावी राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना में चुनाव आचार संहिता लागू होने के चलते यात्रा निकालने पर रोक लगा दी है।
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कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। - फोटो : अमर उजाला, इंदौर
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विस्तार
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केंद्र सरकार की देशभर में सरकारी अधिकारियों की मदद से 'विकसित भारत संकल्प यात्रा' निकालने की योजना कुछ राज्यों में खटाई में पड़ गई है। दरअसल जिन पांच राज्यों में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां यात्रा निकालने पर रोक लगा दी है। बता दें कि इस यात्रा के तहत सरकारी अधिकारियों को हर जिले में रथ प्रभारी बनाया गया है, जिसे लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है और केंद्र सरकार पर सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने का आरोप लगा रहा है। 
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पूर्व नौकरशाहों ने जताई थी नाराजगी
बीते हफ्ते सरकार ने सभी केंद्रीय मंत्रियों को शीर्ष अधिकारियों के नाम देने को कहा था, जिन्हें आगामी विकसित भारत संकल्प यात्रा में अलग-अलग जिलों में रथ प्रभारी बनाया जाएगा। हालांकि सरकार के इस आदेश पर कई अधिकारियों ने नाराजगी जाहिर की है। पूर्व नौकरशाहों ने तो इस आदेश के खिलाफ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को चिट्ठी भी लिखी है। अधिकारियों का कहना है कि नियम, सरकारी अधिकारियों को किसी भी राजनीतिक गतिविधि में शामिल होने की इजाजत नहीं देते। अधिकारियों के एक वर्ग और विपक्ष के एतराज के बीच चुनाव आयोग का निर्देश सामने आया है, जिसमें चुनाव आयोग ने पांच चुनावी राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना में चुनाव आचार संहिता लागू होने के चलते यात्रा निकालने पर रोक लगा दी है। 

चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में लगाई रोक
चुनाव आयोग ने कैबिनेट सचिव को कहा है कि चुनाव के चलते आयोग ने बताई गई गतिविधियों को उन राज्यों में नहीं लागू करने को कहा है, जहां पांच दिसंबर 2023 तक चुनाव आचार संहिता लागू है। चुनाव आयोग का यह निर्देश ऐसे वक्त आया है, जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सरकारी अधिकारियों को रथ प्रभारी बनाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। खरगे ने पत्र में लिखा कि 'यह सेंट्रल सिविल सर्विसेज रूल्स, 1964 का साफ उल्लंघन है, जो कहता है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी राजनीतिक गतिविधि में हिस्सा नहीं लेगा।'
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सरकार ने भी किया चुनावी राज्यों में यात्रा निकालने से किया इनकार
खरगे ने लिखा कि सरकारी अधिकारी सूचना प्रसारित करें, यह स्वीकार्य है लेकिन सरकारी योजनाओं का जश्न मनाने से वह सत्ताधारी पार्टी के राजनीतिक कार्यकर्ता लगेंगे। तथ्य यह है कि सिर्फ बीते नौ साल की उपलब्धियों का प्रचार किया जा रहा है। वहीं सरकार ने भी साफ कर दिया है कि जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां यात्रा फिलहाल नहीं निकाली जाएगी। गुरुवार को केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण सचिव अपूर्व चंद्रा ने बताया कि चुनावी राज्यों में विकसित भारत संकल्प यात्रा निकालने की कोई योजना नहीं है। जब इन राज्यों से आचार संहिता हट जाएगी, तब उन राज्यों में यात्रा निकाली जाएगी। 
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