केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि मौजूदा टीके कोविड 19 के ओमिक्रॉन वेरिएंट पर काम नहीं करते हैं। हालांकि पाए गए कुछ म्यूटेशन टीके के प्रभाव को कम कर सकते हैं। नए वैरिएंट इम्यून को कितना प्रभावित करता है, इस पर सबूत की प्रतीक्षा है।
मंत्रालय ने कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (FAQs) की एक सूची जारी की है जिसे डब्ल्यूएचओ ने 'वैरिएंट ऑफ कंसर्न' के रूप में नामित किया है। कर्नाटक में गुरुवार को ओमिक्रॉन के दो मामले सामने आए हैं।
आप भी दूर कर लें ओमिक्रॉन से जुड़े भ्रम
1. ओमिक्रॉन क्या है और क्यों चिंता का कारण है?
ये कोरोना का नया वैरिएंट है जो 24 नवंबर को दक्षिण अफ्रीका में पहचानना गया। इसे बी.1.1.529 वैरिएंट कहा गया था और बाद में डब्ल्यूएचओ ने इसे ओमिक्रॉन नाम दिया। इस वैरिएंट में बहुत अधिक बदलाव देखा गया खासकर 30 से अधिक बदलाव सिर्फ इसके स्पाइक प्रोटीन में पाए गए हैं जो कि शरीर की प्रतिरक्षा को निशाना बनाते हैं। इसमें हुए बदलावों और इसके कारण दक्षिण अफ्रीका में तेजी से बढ़े कोरोना मरीजों की संख्या को देखते हुए डब्ल्यूएचओ ने इसे चिंता का वैरिएंट करार दिया है।
2. क्या जांच के वर्तमान तरीकों से इसका पता चलता है?
सार्स कोव 2 के वैरिएंट का पता लगाने की सबसे स्वीकार्य विधि आरटीपीसीआर जांच है। इसके जरिये वायरस में मौजूद खास जीन्स का पता लगाया जाता है, जैसे कि स्पाइक (एस), एनवेलप्ड (ई) और न्यूक्लिआकेप्सिड (एन) आदि। हालांकि ओमिक्रॉन के मामले में चूंकि एस जीन में बहुत अधिक बदलाव हुआ है इसलिए कुछ परिणामों में एस जीन की गैरमौजूदगी दर्ज की जा सकती है जिसे एस जीन डॉपआउट कहा जाता है। जांच के दौरान एस जीन ड्रॉपआउट तथा अन्य जीन की मौजूदगी से वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट होने का पता लगाया जा सकता है। हालांकि आखिरी परिणाम जीनोम सीक्वेंसिंग से ही सामने आ सकते हैं।
3. हमें इस नए वैरिएंट से कितना चिंतित होना चाहिए?
डब्ल्यूएचओ किसी वैरिएंट के प्रसार की क्षमता, महामारी में बदलाव के उसके प्रभाव या बीमारी के प्रस्तुतिकरण में क्लिनिकल बदलाव या जन स्वास्थ्य के प्रभाव, सामाजिक उपायों या उपलब्ध डायग्नोसिस, वैक्सीन और इलाज में कमी जैसे कारकों के आधार पर चिंता का वैरिएंट घोषित करता है। ओमिक्रॉन को उसमें हुए बदलावों, तेज प्रसार की आशंका और प्रतिरोध क्षमता को कमजोर करने जैसे आरंभिक सुबूतों के आधार पर चिंता का वायरस घोषित किया गया है। हालांकि इसके फैलाव और प्रतिरोधक क्षमता को निशाना बनाने जैसे तथ्यों के लिए स्पष्ट प्रमाण की प्रतीक्षा है।
4. हमें क्या सुरक्षा उपाय करने चाहिए?
पहले से किए जा रहे सारे सुरक्षा उपाय ही इसमें भी काम आएंगे। सही तरीके से मास्क लगाना, टीके की दोनो डोज लेना, शारीरिक दूरी बनाए रखना और जहां तक संभव हो हवादार जगह में रहना।
5. क्या तीसरी लहर आएगी?
ओमिक्रॉन के मामले दक्षिण अफ्रीका से बाहर मिलने लगे हैं और इसके कैरेक्टर को देखते हुए भारत समेत अन्य देशों में इसका फैलना तय है। हालांकि किस स्तर पर और किस संख्या में और सबसे बढ़कर किस प्रभाव से ये फैलेगा ये अभी अस्पष्ट है। उससे भी बढ़कर भारत में टीकाकरण की तेज रफ्तार और दूसरे दौर में डेल्टा वैरिएंट के व्यापक रूप से प्रसार के कारण बीमारी के यहां ज्यादा फैलाने की उम्मीद कम है। हालांकि इस बारे में वैज्ञानिक प्रमाण अब भी अपेक्षित हैं।
6. क्या अभी उपलब्ध टीके ओमिक्रॉन के खिलाफ असरदार हैं?
यूं तो इस बात के कोई सुबूत नहीं हैं कि वर्तमान टीके ओमिक्रॉन पर कारगर नहीं होंगे, कुछ म्यूटेशन टीकाकरण के प्रभाव को कम कर सकते हैं। हालांकि सेल्यूलर प्रतिरक्षा और साथ में टीकाकरण से बने एंटीबॉडी को मिलाकर ज्यादा बेहतर सुरक्षा मिल सकती है। इसलिए उम्मीद की जा सकती है कि टीकाकरण बीमारी को गंभीर होने से बचा सकता है और इसलिए वर्तमान टीकाकरण महत्वपूर्ण है। जिन्हें नहीं लगा है उन्हें टीका लगवाना चाहिए।
7. भारत किस तरह प्रतिक्रिया दे रहा है?
भारत सरकार स्थिति पर करीबी नजर रख रही है और समय समय पर जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर रही है। इस बीच वैज्ञानिक और चिकित्सा समुदाय भी इस वैरिएंट के प्रति ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाने और सर्विलांस तथा जांच आदि में तेजी लाने में जुट गया है।
8. नए वैरिएंट क्यों सामने आते रहते हैं?
वायरस में जबतक संक्रमित करने, लगातार बढ़ने और प्रसार करने की क्षमता रहती है वो अपने आप में बदलाव करता है। इस प्रक्रिया में नए वैरिएंट का सामने आना सामान्य है।