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Peace Accord: केंद्र और असम सरकार के साथ उल्फा गुट का शांति समझौता, बैठक में अमित शाह और सीएम सरमा रहे मौजूद

Fri, 29 Dec 2023 06:05 AM IST
गुलाम अहमद अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

राजधानी दिल्ली में हुई बैठक में  गृह मंत्री अमित शाह, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए। 
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अमित शाह के साथ असम के मुख्यमंत्री सरमा - फोटो : सोशल मीडिया
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यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के गुट और केंद्र और असम सरकार के बीच त्रिपक्षीय शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।  इस बाबत राजधानी दिल्ली में हुई बैठक में असम के सीएम हिमंता बिस्व शरमा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और असम के डीजीपी भी मौजूद रहे। इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है। लंबे समय तक असम और पूरे उत्तर-पूर्व ने हिंसा झेली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में ही उग्रवाद, हिंसा और विवाद मुक्त उत्तर-पूर्व भारत की कल्पना लेकर गृह मंत्रालय चलता रहा है। भारत सरकार, असम सरकार और ULFA के बीच जो समझौता हुआ है, इससे असम के सभी हथियारी गुटों की बात को यहीं समाप्त करने में हमें सफलता मिल गई है। ये असम और उत्तर-पूर्वी राज्यों की शांति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। 

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वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने कहा कि आज असम के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल और गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में असम की शांति प्रक्रिया निरंतर जारी है। 
 
केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि असम के लिए ऐतिहासिक और सामाजिक-आर्थिक आशावाद का क्षण। उल्फा के साथ शांति एक पुनर्जीवित, शांतिपूर्ण और जीवंत असम के लिए 'मोदी की गारंटी' की पुष्टि करती है। यह समझौता न सिर्फ लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे का समाधान करता है, बल्कि असम को नए रास्ते तलाशने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय रूप से योगदान करने का अवसर भी प्रदान करता है। 
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प्रतिनिधिमंडल में 16 उल्फा सदस्य और 14 लोग नागरिक समाज से शामिल हैं। इसके पहले केंद्र ने अप्रैल में वार्ता समर्थक गुट को प्रस्तावित समझौते का मसौदा भेजा था, जबकि अगस्त में नई दिल्ली में गुट के साथ चर्चा का एक और दौर आयोजित किया गया था। संगठन के महासचिव अनुप चेतिया ने कहा, शांति समझौते के लिए उल्फा के वार्ता समर्थक गुट का 30 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को दिल्ली पहुंच चुका है।

इससे पहले, असम के मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया पर कहा था, समझौते पर हस्ताक्षर शुक्रवार शाम पांच बजे गृह मंत्री अमित शाह, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में किए जाएंगे।

1979 में हुआ था गठन
अलगाववादी संगठन उल्फा का गठन अप्रैल 1979 में बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) से आए बिना दस्तावेज वाले अप्रवासियों के खिलाफ आंदोलन के बाद हुआ था। फरवरी 2011 में यह दो समूहों में विभाजित हो गया था और अरबिंद राजखोवा के नेतृत्व वाले गुट ने हिंसा छोड़ दी थी। यह गुट बिना शर्त सरकार के साथ बातचीत के लिए सहमत है। दूसरे उल्फा गुट का नेतृत्व करने वाले परेश बरुआ बातचीत के खिलाफ हैं। वार्ता समर्थक गुट ने असम के मूल निवासियों की भूमि के अधिकार समेत उनकी पहचान और संसाधनों की सुरक्षा के लिए सुधारों की मांग की है।

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