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विदेशी चंदे से अब धर्मांतरण संभव नहीं: गैर सरकारी संगठनों पर गृह मंत्रालय सख्त, जारी किए ये नए दिशा निर्देश

Tue, 23 Jun 2026 02:44 AM IST
निर्मल कांत पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

सरकार ने विदेशी फंड लेने वाले एनजीओ के लिए एफसीआरए नियमों में बदलाव कर दिया है, जिसके तहत अब उन्हें अपने कार्य और उद्देश्य पहले से तय सूची से चुनने होंगे और विदेशी धन के उपयोग पर सख्त निगरानी होगी। क्या-क्या प्रावधान बदले, पढ़िए रिपोर्ट-
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विदेशी चंदा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/फ्रीपिक
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विस्तार
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सरकार ने विदेशी फंड प्राप्त करने के नियमों में बदलाव किया है, जिसके तहत अब एनजीओ को पहले से तय सूची में से अपने उद्देश्य और कार्य क्षेत्र चुनने होंगे। साथ ही कुछ प्रकार की धार्मिक गतिविधियों की अनुमति दी गई है। लेकिन कई श्रेणियों में धर्मांतरण को स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है।
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गृह मंत्रालय ने अधिसूचना में क्या कहा?
गृह मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी अधिसूचना में कहा गया कि ऐसे किसी भी संगठन को आमतौर पर विदेशी धन प्राप्त करने के लिए पंजीकरण या पूर्व अनुमति नहीं दी जाएगी, जिसमें विदेशी नागरिक (भारतीय मूल के अलावा) मुख्य पदों पर हों।

हालांकि, नियमों में यह भी अपवाद है कि केंद्र सरकार विशेष आदेश के माध्यम से कुछ मामलों में विदेशी नागरिकों को संगठन में प्रमुख पदों पर रहने की अनुमति दे सकती है।
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सरकार ने एफसीआरए नियमों में किए कई संशोधन
सरकार ने एफसीआरए नियम, 2011 में कई संशोधन किए हैं, जिससे यह स्पष्ट हुआ है कि भारत में एनजीओ और अन्य संगठन विदेशी धन कैसे प्राप्त करें और उसका उपयोग कैसे करें। इस पर निगरानी और जवाबदेही और सख्त होगी। 

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संशोधनों के मुताबिक 'मुख्य कार्यकर्ता' की परिभाषा को और व्यापक कर दिया गया है। अब इसमें कंपनी के निदेशक, साझेदार, ट्रस्टी, हिंदू अविभाजित परिवार का कर्ता और वे सभी व्यक्ति शामिल होंगे जो संगठन के प्रबंधन पर नियंत्रण रखते हैं।

अब नए प्रावधान क्या हैं?
  • अब एनजीओ को पंजीकरण के लिए आवेदन करते समय अपने कार्यों का स्पष्ट उद्देश्य और संचालन का राज्य या केंद्र शासित प्रदेश बताना अनिवार्य होगा।
  • आवेदन में यह जानकारी देनी होगी कि संगठन किन उद्देश्यों के लिए पंजीकरण चाहता है और ये उद्देश्य केवल नियमों की सूची में दिए गए विकल्पों में से ही चुने जाएंगे। यह विवरण पंजीकरण प्रमाणपत्र में भी दर्ज किया जाएगा।
  • धार्मिक उद्देश्यों के तहत निर्माण, मरम्मत, धार्मिक स्थलों का रखरखाव, धार्मिक शिक्षा और भक्ति संगीत के प्रचार जैसी गतिविधियां शामिल की गई हैं। लेकिन धार्मिक शिक्षा, धार्मिक परंपराओं के दस्तावेजीकरण और संरक्षण जैसे कार्यों में स्पष्ट रूप से धर्मांतरण को बाहर रखा गया है।
  • इसी तरह जनजातीय और स्थानीय धार्मिक परंपराओं के संरक्षण और धार्मिक शिक्षा, सत्संग, प्रवचन और ध्यान शिविरों में भी धर्मांतरण की अनुमति नहीं होगी। 
  • पुराने पंजीकृत संगठनों को 2026 तक अपने उद्देश्यों और कार्य क्षेत्रों की जानकारी सरकार को देनी होगी।
  • सरकार ने अतिरिक्त उद्देश्यों के लिए आवेदन करने पर 300 रुपये का शुल्क भी निर्धारित किया है।
  • जो एनजीओ सक्रिय नहीं हैं, उन्हें नियंत्रित करने के लिए सरकार ने यह नियम बनाया है कि पिछले दो वित्तीय वर्षों में कम से कम 10 लाख रुपये विदेशी धन का उपयोग अपने कार्यों पर करना जरूरी होगा। पंजीकरण नवीनीकरण या रद्द होने से बचने के लिए यह खर्च अनिवार्य होगा।
  • विदेशी फंड प्राप्त करने वाले एनजीओ को अगली किस्त तभी मिलेगी, जब वे पिछली किस्त का कम से कम 75 प्रतिशत उपयोग कर चुके हों।
  • सरकार मौके पर जाकर इसकी भी जांच करेगी। एनजीओ को अब अपने आवेदन में सोशल मीडिया खाते की जानकारी भी देनी होगी।

नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना
प्रशासनिक खर्च के लिए निर्धारित 20 फीसदी की सीमा से अधिक विदेशी चंदा खर्च करने पर एक लाख रुपये या अतिरिक्त खर्च की गई राशि का पांच प्रतिशत, जो भी अधिक हो, का जुर्माना लगेगा।

सट्टा गतिविधियों में विदेशी फंड निवेश करने पर एक लाख रुपये या निवेशित राशि का 30 फीसदी, जो भी अधिक हो, का दंड लगाया जाएगा, जबकि इससे अर्जित पूरी आय भी वसूल की जाएगी। इसके अलावा, वहां से मिले 100 प्रतिशत रिटर्न की वसूली की जाएगी।
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विदेशी चंदे का उपयोग तय मकसद से अलग किसी अन्य कार्य में करने, कानून का उल्लंघन करते हुए विदेशी फंड स्वीकारने या खर्च करने पर भी जुर्माना लगेगा। साथ ही, पंजीकरण में स्वीकृत मकसद या प्रदेश के बाहर धन के उपयोग पर भी संबंधित राशि का 30 फीसदी या एक लाख रुपये, का जुर्माना लगाया जाएगा।
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