फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

केंद्र सरकार ने दी चेतावनी, कहा- स्थायी कर्मचारी को अनुबंध पर नहीं बदल सकती कंपनियां

Mon, 21 Dec 2020 01:51 AM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI
विज्ञापन

कोरोना वायरस महामारी ने हजारों लाखों की नौकरी को प्रभावित किया। सरकार के पैकेज देने के बाद भी कंपनियों से छंटनी की खबरें आती रही। लेकिन नौकरीपेशा लोगों को यह खबर खासा खुश कर सकती है।

विज्ञापन


केंद्र सरकार ने कंपनियों को चेतावनी दी है कंपनी स्थायी नौकरी पर रखे हुए कर्मचारियों को अनुबंध वर्कर के तौर पर बदल नहीं सकती। ऐसी खबरें आई थीं कि कुछ कंपनियां अपने स्थायी कर्मचारियों को अनुबंध पर रख रही हैं।


बता दें कि केंद्र सरकार ने श्रम कानून में बदलाव किया था। जिसे लेकर कानून की आड़ में कंपनियां अपने स्थायी कर्मचारियों को अनुबंध पर बदल रही थीं। इसे लेकर सरकार ने कंपनियों को आगाह किया है। साथ ही नए श्रम कानूनों को लेकर जल्द ही श्रम मंत्रालय में बैठक होने वाली है।
विज्ञापन


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार सर्विस रूल्स में जल्द ही बड़े बदलाव करेगी। जिसमें स्थायी नौकरी करने वाले को अनुबंध में नहीं बदला जा सकेगा। साथ ही छंटनी हुए कर्मचारियों की मदद के लिए विशेष फंड का नियम बनाया जाएगा और इनके लिए सरकार री-स्किलिंग कराएगी। साथ ही कंपनियों को श्रम मंत्रालय ने अपने सुझाव दिए हैं।

नया लेबर कोड : जानिए कितने घंटे ज्यादा रोज करना होगा काम, मिलेगा ओवर टाइम भी  
केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने एक दिन में कामकाज के अधिकतम घंटों को बढ़ाकर 12 करने का प्रस्ताव पेश किया है। पेशेवर सुरक्षा, स्वास्थ्य व काम करने की स्थिति (ओएसएच) कोड 2020 के तहत तैयार नियमों के ड्राफ्ट में यह प्रावधान पेश किया गया है, जिसमें काम के दौरान दिए गए इंटरवल को भी कामकाज के घंटों का हिस्सा माना गया है। ओएसएच कोड को इसी साल संसद ने मंजूरी दी थी।

हालांकि कामकाज के घंटे बढ़ाए जाने के प्रस्ताव का आने वाले दिनों में भारी विरोध देखने को मिल सकता है, क्योंकि संसद की तरफ से मंजूर किए गए ओएसएच कोड में एक दिन में कामकाज के अधिकतम 8 घंटे तय किए गए थे।

इसी विरोध से बचने के लिए श्रम मंत्रालय ने 19 नवंबर को जारी ड्राफ्ट नियमों की अधिसूचना में अधिकतम साप्ताहिक कामकाज की सीमा 48 घंटे तय की गई है। इस स्थिति में एक साप्ताहिक अवकाश के अतिरिक्त शेष छह दिन में अधिकतम कामकाज 8 घंटा प्रतिदिन ही बैठता है। यह नया लेबर कोड देश में मौजूदा 13 केंद्रीय श्रम कानूनों की जगह लेगा।

श्रम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, देश के विभिन्न हिस्सों में जलवायु परिस्थतियों को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया गया है। साथ ही इससे श्रमिकों को ओवरटाइम भत्ते के जरिये अतिरिक्त कमाई करने की भी अनुमति मिलेगी।
विज्ञापन


उन्होंने कहा, हमने ड्राफ्ट नियमों में इस बात के पर्याप्त प्रावधान किए हैं, जिससे 8 घंटे से ज्यादा काम के लिए श्रमिकों को ओवरटाइम मिल सके।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें