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टीकाकरण: वैक्सीन लेने के बाद हुई मौतों पर सरकार की पहली समीक्षा आई सामने

Wed, 16 Jun 2021 03:03 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

  • 31 लोगों में हुई एलर्जी, महाराष्ट्र में एक मरीज की मौत
  • अब तक 25 करोड़ से ज्यादा लोगों को लगा वैक्सीन, लेकिन मौत की आशंका बेहद कम
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कोरोना वैक्सीन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PTI
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विस्तार
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कोरोना वैक्सीन लेने के बाद हुई मौतों पर सरकार की पहली समीक्षा सामने आई है जिसके अनुसार 31 लोगों ने वैक्सीन लेने के बाद एलर्जी की शिकायत की है। इनमें से एक मरीज की महाराष्ट्र में मौत हुई है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक देश में 25 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लग चुकी है। उनकी तुलना में यह संख्या बेहद कम है जिससे पता चलता है कि वैक्सीन लोगों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है।

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दरअसल, टीकाकरण के प्रतिकूल प्रभावों को जानने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीकाकरण शाखा ने अलग अलग विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया था जिनमें प्रसूति रोग से लेकर हार्ट, न्यूरो, पल्मोनरी इत्यादि के वरिष्ठ डॉक्टर शामिल हैं। समिति के पास पांच फरवरी को पांच, नौ मार्च को आठ और 31 मार्च को 18 मौतों की जानकारी मिली जिनकी समीक्षा करने पर यह पाया गया कि बीते 5 फरवरी से 31 मार्च के बीच वैक्सीन लेने वाले 60 लाख से अधिक लोगों में सिर्फ 31 को एलर्जी (एनाफिलैक्सिस) की परेशानी हुई। इनमें से एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है।

आंकड़ों के अनुसार, 5 फरवरी से 31 मार्च के बीच 28 लोगों की मौत हुई है लेकिन ज्यादातर मौतों का कारण वैक्सीन नहीं था जबकि नौ मौतों के पीछे वैक्सीन की भूमिका थी कि नहीं, यह पता नहीं किया जा सका। राष्ट्रीय टीकाकरण तकनीकी समूह के अध्यक्ष डॉ. एनके अरोड़ा का कहना है कि देश में वैक्सीन के बाद पहली मौत एनाफिलैक्सिस रिएक्शन से हुई है। हालांकि बहुत कम लोगों पर वैक्सीन के गंभीर दुष्प्रभाव हुए।
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उन्होंने बताया कि एनाफिलैक्सिस एक तरह की एलर्जी है जोकि जानलेवा भी हो सकती है। समिति के अनुसार मुंबई के 68 वर्षीय निवासी बीते आठ मार्च को कोविशील्ड वैक्सीन लिया था। इसके बाद एलर्जी के चलते इनकी मौत हुई थी। समिति के पास 31 मार्च को आए दस्तावेजों की जांच के बाद मौत की पुष्टि हुई है।

पहली वैक्सीन लेने वाले को हुई थी एलर्जी
समिति के पास वैक्सीन से जुड़े दो और मामलों की पुष्टि हुई है। हालांकि इनमें से किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है। 16 जनवरी को दिल्ली एम्स में जब टीकाकरण अभियान शुरू हुआ था उस दौरान सबसे पहले वैक्सीन वहां के एक कर्मचारी ने लगवाई थी। इस 22 वर्षीय कर्मचारी को कोवाक्सिन की पहली खुराक लगने के बाद रात को तबियत खराब हुई और इसे अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था।




उस दौरान दक्षिणी दिल्ली जिला निवासी इस कर्मचारी में एलर्जी हुई थी। हालांकि समय रहते अस्पताल में उपचार मिलने से डॉक्टरों को जान बचाने में कामयाबी मिली। इसी तरह का दूसरा मामला राजस्थान की 21 वर्षीय युवती का सामने आया था जिसे 19 जनवरी को कोविशील्ड की डोज दी गई। यह महिला भी स्वास्थ्य कर्मचारी है। अस्पताल में भर्ती होने के दौरान एनाफिलैक्सिस एलर्जी के बारे में पता चला। हालांकि उपचार समय पर मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकी।

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