अगले आम चुनाव से पहले मोदी सरकार पिछड़ा वर्ग मध्य वर्ग और किसान वर्ग के लिए बड़ा सियासी दांव चलाने की तैयारी में है। जहां सरकार मध्य वर्ग को आयकर और होम लोन में बड़ी राहत देने की तैयारियों में जुटी है। वहीं ओबीसी आरक्षण में बड़े बदलाव के लिए ओबीसी आयोग की रिपोर्ट तैयार करा रही है। डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनेल एंड ट्रेनिंग ने शुक्रवार को ही विभिन्न मंत्रालयों में ओबीसी वर्ग की जातियों की अलग अलग स्थिति संबंधी रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंप दी है। किसानों को राहत देने के लिए केंद्र पहले ही तेलांगाना सरकार की नकद राहत फ़ार्मूला अपनाने की तैयारी में है।
एक केंद्रीय मंत्री के मुताबिक सामान्य वर्ग आरक्षण से ऊंची जातियों को साधने के बाद सरकार की निगाहें पिछड़ी जाति वर्ग पर है। चूंकि सरकार ने ओबीसी वर्ग में आरक्षण बंटवारे के लिए गठित रोहिणी आयोग का कार्यकाल 31 मई तक बढ़ा दिया है। मगर सरकार की कोशिश बजट सत्र में ही किसी तरह रिपोर्ट पेश कराने की है। अगर कोटे में कोटा लागू करने पर सहमति बनी तो इस वर्ग की पार्टी समर्थक जातियों को साधे रखने की भी रणनीति बनेगी।
दरअसल डीओपीटी की पीएमओ को सौंपी रिपोर्ट में साफ हुआ है कि ओबीसी आरक्षण का लाभ दो दर्जन जातियों तक ही सीमित है। इसके इतर ओबीसी में शामिल 500 से भी अधिक जातियों का नौकरियों में प्रतिनिधियों की उपस्थिति लगभग नगण्य है। ऐसे में अगर कोटे में कोटा लागू हुआ तो पार्टी को उपेक्षित जातियों का व्यापक समर्थन मिलेगा। यही कारण है कि डीओपीटी ने सभी मंत्रालयों से एक हफ़्ते में जानकारी हासिल कर पीएमओ को रिपोर्ट दी है।
मध्य वर्ग किसान पर नजर
सरकार बजट सत्र में मध्य वर्ग को सस्ता होम लोन और आयकर में बड़ी छूट देने की तैयारी में है। इसके लिये वित्त मंत्रालय में बीते दो हफ़्ते से माथापच्ची चल रही है। किसानों को सब्सिडी का नकद लाभ सहित दूसरे तरह का लाभ पहुंचाने पर भी मंथन जारी है।