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देश में 'सरपंच' को मिल रहा सबसे कम मेहनताना: केंद्र ने कामगारों का बढ़ाया भत्ता तो 'मुखिया' महज 3,000 रुपये पर अटके

सार

देश के विभिन्न राज्यों में सरपंचों को तीन हजार रुपये से लेकर 3,500 रुपये तक का मानदेय मिलता है। हरियाणा में 2016 में पंच को एक हजार रुपये तो सरपंच को 3000 रुपये दिए जाने की घोषणा हुई थी। पहले पंच को 600 रुपये और सरपंच को दो हजार रुपये मिलते थे। अब पिछले तीन साल से यह राशि भी नहीं मिल सकी है...
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शपथ लेते नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
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विस्तार
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देश में लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई यानी ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों के वेतन भत्तों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। केंद्र एवं राज्यों के सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता मिला है, तो वहीं श्रम और रोजगार मंत्रालय ने विभिन्न क्षेत्रों के कामगारों को परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (वीडीए) देने की घोषणा कर दी है। उन्हें यह भत्ता एक अक्तूबर से मिलेगा। इसमें निर्माण क्षेत्र, रेलवे, कृषि, एयरपोर्ट व बंदरगाह आदि जगहों पर काम करने वाले कामगार शामिल हैं। इन क्षेत्रों में लगे कामगारों को 'वीडीए' मिलने के बाद इनके पारिश्रमिक में प्रतिदिन 100 रुपये से 200 रुपये का इजाफा होगा। दूसरी तरफ विभिन्न राज्यों में चुने गए सरपंचों को पहले की तरह प्रतिमाह तीन हजार रुपये से 3,500 रुपये का मानदेय मिल रहा है।   

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केंद्र सरकार ने गत सप्ताह 'परिवर्तनीय महंगाई भत्ता' बढ़ाने की घोषणा की है। इसके तहत विभिन्न क्षेत्रों में लगे कामगारों को रोजाना मिलने वाला पारिश्रमिक एक अक्तूबर से बढ़ी हुई दरों पर देने की घोषणा की गई है।
 

कृषि क्षेत्र के कामगारों के लिए बढ़ा 'परिवर्तनीय महंगाई भत्ता'
 

    कामगारों की श्रेणी    ए सिटी    बी सिटी    सी सिटी
    अकुशल                  84          77             77  

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    अर्ध कुशल               91          84             77
    कुशल                   100          91             84
    अत्यधिक कुशल       109        102             91  
 

कृषि क्षेत्र के कामगार को अब मिलेगा इतना पारिश्रमिक
 

    कामगारों की श्रेणी     ए सिटी     बी सिटी      सी सिटी
    अकुशल                     417       380            377  
    अर्ध कुशल                 455        419            384
    कुशल                       495        455            418
    अत्यधिक कुशल           547        509            455    
 

कंस्ट्रक्शन एवं मेंटेनेंस क्षेत्र के श्रमिकों का बढ़ा भत्ता


    कामगारों की श्रेणी      भत्ता       भत्ता         भत्ता
    अकुशल                    131       109           87  
    अर्ध कुशल                 145       123          102
    कुशल                       158       145          123
    अत्यधिक कुशल           171       158          145
 

अब इन्हें मिलेगा इतना पारिश्रमिक


    कामगारों की श्रेणी    कुल राशि    कुल राशि     कुल राशि  
    अकुशल                    654           546             437  
    अर्ध कुशल                724            617            512
    कुशल                      795           724             617
    अत्यधिक कुशल          864           795             724
 

रेलवे, एयरपोर्ट व बंदरगाहों पर काम करने वालों को मिलेगी यह राशि
 

   शहरों की श्रेणी    वीडीए     कुल पारिश्रमिक
    ए                      131          654
    बी                     109          546
    सी                     87           437
 

3,500 रुपये से आगे नहीं बढ़ पा रहे सरपंच

देश के विभिन्न राज्यों में सरपंचों को तीन हजार रुपये से लेकर 3,500 रुपये तक का मानदेय मिलता है। हरियाणा में 2016 में पंच को एक हजार रुपये तो सरपंच को 3000 रुपये दिए जाने की घोषणा हुई थी। पहले पंच को 600 रुपये और सरपंच को दो हजार रुपये मिलते थे। अब पिछले तीन साल से यह राशि भी नहीं मिल सकी है। सरपंच एसोसिएशन के प्रधान सर्वजीत सिंह ने इस बाबत हरियाणा सरकार को अवगत कराया था। मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री तक बात पहुंचाई गई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। महाराष्ट्र में भी सरपंच को 3,000 रुपये मानदेय मिलता है। राजस्थान में सरपंच का वेतन 3500 रुपये तक है। इसके अलावा सरपंच को ग्राम सभा भत्ता भी दिया जाता है जो 100 रुपये होता है। बिहार में सरपंच को 2500 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। उप सरपंच को 1200 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। इसी तरह मुखिया को 2500 प्रतिमाह व उप मुखिया को 1200 रुपये प्रतिमाह दिए जाने का प्रावधान है। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को 3500 रुपये वेतन मिलता है। पहले यह राशि 1000 रुपये थी। उसके बाद 2500 रुपये हुई। अब कुछ प्रधान 3500 रुपये की मानदेय राशि को 10 हजार रुपये करने की मांग कर रहे हैं। कई दूसरे राज्यों में भी ग्राम पंचायत के सदस्यों को मिलने वाली मानदेय राशि में बढ़ोतरी की मांग की गई है।

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उतना मिल जाए, जो सरपंच ने खर्च किया है: सुरेश चौहान


हरियाणा के रेवाड़ी जिले के गांव गोठड़ा टप्पा ढहिना के सरपंच सुरेश चौहान, जो एमएनसी कंपनी में सात लाख रुपये का वेतन छोड़कर गांव में आ गए, वे बताते हैं, कम से कम सरपंच को उतना मिलना चाहिए, जो उसने खर्च किया है। भले ही मानदेय राशि मिले या न मिले, उससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। सरपंच का काम बहुत मुश्किलों वाला है। गांव से लेकर जिला स्तर पर और राज्य के दूसरे हिस्सों में उसे जाना पड़ता है। गांव का विकास देखना है, जिला प्रशासन तक दौड़भाग करनी है। इन सबके बीच पुलिस थाने या चौकी से फोन आता रहता है कि आपके गांव का केस आया है, आप आ जाएं। मंत्रियों और विधायकों के दौरे भी देखने हैं। बहुत से ऐसे मौके होते हैं, जब सरपंच को अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है। कब बिल जमा होता है, कब पास होता है, इसका कुछ नहीं पता। सरकारी फाइलों के सरकने की प्रक्रिया से सभी वाकिफ हैं। सरकार को इतना करना चाहिए कि सरपंच जो कुछ खर्च कर रहा है, बस उसी का समय से भुगतान हो जाए। बाकी तो सरपंच का पद निस्वार्थ सेवा के लिए होता है।

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