देश में लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई यानी ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों के वेतन भत्तों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। केंद्र एवं राज्यों के सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता मिला है, तो वहीं श्रम और रोजगार मंत्रालय ने विभिन्न क्षेत्रों के कामगारों को परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (वीडीए) देने की घोषणा कर दी है। उन्हें यह भत्ता एक अक्तूबर से मिलेगा। इसमें निर्माण क्षेत्र, रेलवे, कृषि, एयरपोर्ट व बंदरगाह आदि जगहों पर काम करने वाले कामगार शामिल हैं। इन क्षेत्रों में लगे कामगारों को 'वीडीए' मिलने के बाद इनके पारिश्रमिक में प्रतिदिन 100 रुपये से 200 रुपये का इजाफा होगा। दूसरी तरफ विभिन्न राज्यों में चुने गए सरपंचों को पहले की तरह प्रतिमाह तीन हजार रुपये से 3,500 रुपये का मानदेय मिल रहा है।
कृषि क्षेत्र के कामगारों के लिए बढ़ा 'परिवर्तनीय महंगाई भत्ता'
कामगारों की श्रेणी ए सिटी बी सिटी सी सिटी
अकुशल 84 77 77
कृषि क्षेत्र के कामगार को अब मिलेगा इतना पारिश्रमिक
कामगारों की श्रेणी ए सिटी बी सिटी सी सिटी
अकुशल 417 380 377
अर्ध कुशल 455 419 384
कुशल 495 455 418
अत्यधिक कुशल 547 509 455
कंस्ट्रक्शन एवं मेंटेनेंस क्षेत्र के श्रमिकों का बढ़ा भत्ता
कामगारों की श्रेणी भत्ता भत्ता भत्ता
अकुशल 131 109 87
अर्ध कुशल 145 123 102
कुशल 158 145 123
अत्यधिक कुशल 171 158 145
अब इन्हें मिलेगा इतना पारिश्रमिक
कामगारों की श्रेणी कुल राशि कुल राशि कुल राशि
अकुशल 654 546 437
अर्ध कुशल 724 617 512
कुशल 795 724 617
अत्यधिक कुशल 864 795 724
रेलवे, एयरपोर्ट व बंदरगाहों पर काम करने वालों को मिलेगी यह राशि
शहरों की श्रेणी वीडीए कुल पारिश्रमिक
ए 131 654
बी 109 546
सी 87 437
3,500 रुपये से आगे नहीं बढ़ पा रहे सरपंच
देश के विभिन्न राज्यों में सरपंचों को तीन हजार रुपये से लेकर 3,500 रुपये तक का मानदेय मिलता है। हरियाणा में 2016 में पंच को एक हजार रुपये तो सरपंच को 3000 रुपये दिए जाने की घोषणा हुई थी। पहले पंच को 600 रुपये और सरपंच को दो हजार रुपये मिलते थे। अब पिछले तीन साल से यह राशि भी नहीं मिल सकी है। सरपंच एसोसिएशन के प्रधान सर्वजीत सिंह ने इस बाबत हरियाणा सरकार को अवगत कराया था। मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री तक बात पहुंचाई गई, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। महाराष्ट्र में भी सरपंच को 3,000 रुपये मानदेय मिलता है। राजस्थान में सरपंच का वेतन 3500 रुपये तक है। इसके अलावा सरपंच को ग्राम सभा भत्ता भी दिया जाता है जो 100 रुपये होता है। बिहार में सरपंच को 2500 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। उप सरपंच को 1200 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। इसी तरह मुखिया को 2500 प्रतिमाह व उप मुखिया को 1200 रुपये प्रतिमाह दिए जाने का प्रावधान है। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को 3500 रुपये वेतन मिलता है। पहले यह राशि 1000 रुपये थी। उसके बाद 2500 रुपये हुई। अब कुछ प्रधान 3500 रुपये की मानदेय राशि को 10 हजार रुपये करने की मांग कर रहे हैं। कई दूसरे राज्यों में भी ग्राम पंचायत के सदस्यों को मिलने वाली मानदेय राशि में बढ़ोतरी की मांग की गई है।
हरियाणा के रेवाड़ी जिले के गांव गोठड़ा टप्पा ढहिना के सरपंच सुरेश चौहान, जो एमएनसी कंपनी में सात लाख रुपये का वेतन छोड़कर गांव में आ गए, वे बताते हैं, कम से कम सरपंच को उतना मिलना चाहिए, जो उसने खर्च किया है। भले ही मानदेय राशि मिले या न मिले, उससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। सरपंच का काम बहुत मुश्किलों वाला है। गांव से लेकर जिला स्तर पर और राज्य के दूसरे हिस्सों में उसे जाना पड़ता है। गांव का विकास देखना है, जिला प्रशासन तक दौड़भाग करनी है। इन सबके बीच पुलिस थाने या चौकी से फोन आता रहता है कि आपके गांव का केस आया है, आप आ जाएं। मंत्रियों और विधायकों के दौरे भी देखने हैं। बहुत से ऐसे मौके होते हैं, जब सरपंच को अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है। कब बिल जमा होता है, कब पास होता है, इसका कुछ नहीं पता। सरकारी फाइलों के सरकने की प्रक्रिया से सभी वाकिफ हैं। सरकार को इतना करना चाहिए कि सरपंच जो कुछ खर्च कर रहा है, बस उसी का समय से भुगतान हो जाए। बाकी तो सरपंच का पद निस्वार्थ सेवा के लिए होता है।