किसी भी तरह के नगा समूह को संघर्ष विराम के नियमों के उल्लंघन करने या गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने की छूट नहीं मिलेगी। संघर्ष विराम निगरानी बोर्ड के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल अमरजीत सिंह बेदी ने शनिवार को यह बात कही।
केंद्र ने पांच नगा समूहों के साथ संघर्ष विराम समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें 1997 में एनएससीएन (आईएम), 2012 में एनएससीएन (यूनिफिकेशन), 2015 में एनएससीएन (रिफोर्मेशन), 2019 में एनएससीएन-के (खांगो) और 2021 में एनएससीएन-के (निक्की) के साथ समझौते शामिल हैं। कुल 24 नगा भूमिगत समूहों में से केवल इन पांच ने केंद्र के साथ समझौता किया है।
लेफ्टिनेंट जनरल बेदी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, शांति बहाल करने के लिए संघर्ष विराम समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, ताकि नगा मुद्दे के समाधान के लिए राजनीतिक चर्चा, आपसी भरोसे, सम्मान और शांतिपूर्ण स्थिति के माहौल को आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा कि केंद्र के साथ संघर्ष विराम समझौतों पर हस्ताक्षर करने वाले सभी नगा समूहों ने संघर्ष विराम के नियमों का पालन करने की प्रतिबद्धता जताई है।
उन्होंने कहा कि नगा समूहों शिविर, संघर्ष विराम पहचान पत्र और संघर्ष विराम कार्यालयों सहित कुछ सहायता प्रदान की गई है, जो पूरी तरह से प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए है, ताकि संघर्ष विराम से जुड़े कार्य किए जा सकें और संघर्ष विराम का सुचारू रूप से जारी रहना सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने आगे कहा, बहरहाल, इन सुविधाओं का मकसद किसी भी तरह से आम जनता को असुविधा पहुंचाना नहीं है और किसी भी तरह के समूह को संघर्ष विराम के नियमों के उल्लंघन या गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने की छूट नहीं मिलेगी।
बेदी ने कहा, संघर्ष विराम तंत्र की प्रभावशीलता का आकलन नगा समुदाय के लोगों द्वारा वर्षों से शांतिपूर्ण माहौल के साथ-साथ राजनीतिक मुद्दे को हल करने के लिए राजनीति वार्ताओं की निरंतरता से किया जा सकता है।