इस मौके पर सीडीएस अनिल चौहान ने कहा, "जनरल बिपिन रावत और मैं एक ही रेजिमेंट से थे, लेकिन बटालियन अलग-अलग थी। मैंने सशस्त्र बलों के दूसरे सीडीएस के रूप में उनका अनुसरण किया, फिर मेरा काम थोड़ा आसान हुआ। उन्होंने (सशस्त्र बलों में) सुधारों का शुरुआती सेट तय किया था। यह मुझे उनके विचारों को मजूबत नीतियों में बदलने और मील के पत्थर को तय करने में मदद करता है।"
उन्होंने कहा कि हम देश के पहले सीडीएस के रूप में जनरल बिपिन रावत के द्वारा किए गए प्रयासों को जारी रखेंगे। लेकिन जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं तो यह यही भारत सरकार थी जिसने सीडीएस के पद की घोषणा करके और सैन्य मामलों के विभाग को बनाकर सुधारों को रास्ता अपनाया। यह एक महत्वपूर्ण घोषणा थी और इसे सुधारों का शुरुआती बिंदु कहा जा सकता है।
जनरल चौहान ने कहा, मैं वहीं करने की कोशिश कर रहा हूं, जो जनरल बिपिन रावत ने शुरू किया था। इस साल मैं तीनों सेनाओं में साझा रूप से काम करने की संस्कृति को विकसित करने पर काम कर रहा हूं। उन्होंने आगे कहा, भारत का अमृतकाल आ गया है। विकसित भारत को सशक्त भारत बनाना है। हमें भविष्य के लिए तैयार सशस्त्र बल बनना होगा।
सीडीएस रावत की विरासत राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरक: डोभाल
एनएसए अजीत डोभाल ने कहा, देश के नायक राष्ट्रीय इच्छाशक्ति और देश के अस्तित्व के लिए आवश्यक हैं। आज जनरल बिपिन रावत हमारे बीच नहीं है। हम चाहे तो उनकी उनकी विरासत का इस्तेमाल राष्ट्रीय इच्छाशक्ति के निर्माण के लिए कर सकते हैं। डोभाल देश के पहले चीफ और डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत की 66वीं जयंती कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। शनिवार को जनरल बिपिन रावत मेमोरियल लेक्चर का आयोजन किया गया। कायर्क्रम में मौजूद सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा, जनरल बिपिन रावत और मैं एक ही रेजिमेंट से थे, लेकिन हमारी बटालियन अलग थीं। मैंने थल सेना के दूसरे सीडीएस के रूप में उनको अनुसरण किया। उन्होंने आगे कहा कि आज हम जिन सुधारों की मांग कर रहे हैं, वे देश के पहले सीडीएस के रूप में जनरल बिपिन रावत के प्रयासों की देन हैं।